वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर रोजा खोलने के मामले में 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया है और पुलिस कार्रवाई के आधार पर सवाल उठाए हैं.
ओवैसी ने कहा कि नाव पर बैठकर खाना खाने से आखिर किसकी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं. उन्होंने पूछा कि अगर कोई गंगा में नाव पर खाना खाता है तो इससे किसकी भावना आहत होती है? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गंगा में गिरने वाला सीवेज क्या किसी को आहत नहीं करता.
उन्होंने आगे कहा कि गिरफ्तार किए गए युवक जेल में हैं और उनका 'एकमात्र अपराध यह है कि वे मुसलमान हैं.' साथ ही उन्होंने तुलना करते हुए पूछा कि रमजान के दौरान शराब की दुकानें खुली रहने पर क्या मुस्लिमों की भावनाएं आहत नहीं होतीं.
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वायरल वीडियो के बाद हुई पुलिस कार्रवाई
दरअसल, यह विवाद वाराणसी में इस सप्ताह सामने आए एक वीडियो के बाद शुरू हुआ. वीडियो में कुछ लोग गंगा नदी में नाव पर इफ्तार करते हुए और चिकन बिरयानी खाते हुए दिखाई दे रहे थे. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की.
इस मामले में कोतवाली थाने में भाजपा युवा मोर्चा के शहर इकाई प्रमुख रजत जायसवाल की शिकायत पर केस दर्ज किया गया. शिकायत में आरोप लगाया गया कि नदी में मांसाहारी भोजन करना और उसके अवशेष गंगा में फेंकना हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है.
पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
कई धाराओं में केस दर्ज, जांच जारी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर पूजा स्थल को अपवित्र करने, धार्मिक भावनाएं आहत करने, समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने और सार्वजनिक उपद्रव से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं. इसके अलावा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत भी प्रावधान लगाए गए हैं.
एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस विजय प्रताप सिंह ने बताया कि वीडियो सामने आने और औपचारिक शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है.
इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है. विपक्षी नेताओं ने गिरफ्तारी और धार्मिक भावनाएं आहत होने के आधार पर सवाल उठाए हैं, जिससे यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है.
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