आजादी के बाद पहली बार! UP में होने जा रही है जातिगत जनगणना, जानिए पूरा प्लान

उत्तर प्रदेश में पहली बार जातीय जनगणना की तैयारी जोरों पर है. जनगणना निदेशक शीतल वर्मा ने बताया कि ये प्रक्रिया दो चरणों में होगी, जिसमें पहला चरण घरेलू स्तर पर डेटा संग्रह का है और दूसरा चरण फरवरी में शुरू होगा. ये जातिगत जनगणना केंद्र सरकार की नीति के तहत प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखते हुए की जाएगी.

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दो चरणों में जातिगत जनगणना होगी. (Photo: PTI) दो चरणों में जातिगत जनगणना होगी. (Photo: PTI)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 02 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST

उत्तर प्रदेश में जातीय जनगणना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जनगणना निदेशक और मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने बताया कि राज्य में जातीय जनगणना की तैयारी की जा रही है. शीतल वर्मा ने ये भी बताया कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है.

पहले फेज में 'हाउस होल्ड लेवल' यानी घरेलू स्तर पर डेटा जुटाया जाएगा. इसमें परिवारों की बुनियादी जानकारी और मकानों की लिस्ट तैयार की जाएगी. दूसरा चरण सबसे अहम चरण होगा.

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दूसरे फेज की जनगणना फरवरी में शुरू होगी जिसमें 'व्यक्तिगत डेटा' का कलेक्शन किया जाएगा. इसी दौरान लोगों से उनकी जाति के बारे में जानकारी ली जाएगी.

वर्मा ने जानकारी दी कि दूसरे फेज में होने वाली ये गणना, आजादी के बाद पहली बार होगी. केंद्र सरकार की नीति के तहत इस बार जातिगत आंकड़ों को जनगणना का हिस्सा बनाया जा रहा है. अब तक जनगणना में जातियों का विवरण इस तरह व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया जाता था.

अभी एसओपी का इंतजार

भले ही जातिगत जनगणना प्रक्रिया शुरू करने की तैयारियां हो रही हैं, लेकिन अभी इसकी एसओपी (Standard Operating Procedure) तय होना बाकी है. जातिगत जनगणना की प्रक्रिया कैसे चलेगी और किन नियमों का पालन होगा, इसके लिए एसओपी का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है.

यह भी पढ़ें: दिल्ली में 16 अप्रैल से जनगणना का पहला चरण, जमा होगा घरों और इमारतों का डेटा

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नीति और डेटा सुरक्षा

शीतल वर्मा ने बताया कि जातीय जनगणना पूरी तरह से केंद्र सरकार की निर्धारित नीतियों के तहत ही पूरी होगी. व्यक्तिगत डेटा कलेक्शन के दौरान प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा.

जातिगत जनगणना उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक ढांचे के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है. फरवरी में होने वाले दूसरे चरण पर प्रशासन और जनता, दोनों की नजरें टिकी हुई हैं. इसके जरिए राज्य की आबादी के असल जातीय आंकड़े सामने आ पाएंगे.

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