तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपनी पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक (I-PAC) पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पार्टी ने याचिका में आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और केंद्र सरकार के निर्देश पर ईडी पीएमएलए के तहत मिली अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है.
तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि ईडी की यह कार्रवाई 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और पार्टी की तैयारियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है. याचिका में कहा गया है कि छापेमारी और जब्ती का किसी भी वैध मनी लॉन्ड्रिंग जांच से कोई प्रत्यक्ष या कारणात्मक संबंध नहीं है.
तृणमूल कांग्रेस ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत बिना किसी पूर्व सूचना या उचित कारण के संवेदनशील सामग्री जब्त की. ममता बनर्जी की पार्टी ने इसे 'फिशिंग एंड रोविंग इन्क्वायरी' करार देते हुए कहा कि यह कानून के तहत मान्य नहीं है. तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि जब्त किया गया डेटा हमारी चुनावी रणनीति, संगठनात्मक ढांचे और शोध से जुड़ी गोपनीय राजनीतिक सामग्री है, जिसका कथित अपराध की आय से कोई लेना-देना नहीं है.
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केंद्र के इशारे पर विपक्ष को निशाना बना रही ईडी: टीएमसी
टीएमसी ने यह भी कहा कि राजनीतिक दल लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं और उन्हें डराने-धमकाने या दबाव में डालकर उनके कामकाज में बाधा नहीं डाली जा सकती. याचिका में यह तर्क दिया गया है कि इस तरह की कार्रवाइयों से निजता के अधिकार और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव में भागीदारी के अधिकार का हनन होता है. पार्टी ने ईडी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एजेंसी केंद्र सरकार के इशारे पर विपक्षी दलों को निशाना बना रही है.
योचिका में आरोप लगाया गया है कि I-PAC और उसके डायरेक्ट प्रतीक जैन को जानबूझकर टारगेट किया गया ताकि टीएमसी की गोपनीय चुनावी रणनीति तक पहुंच बनाई जा सके. टीएमसी ने ईडी द्वारा जब्त डेटा के लीक होने की आशंका भी जताई है. ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की 'राजनीतिक बदले की कार्रवाई' के विरोध में जादवपुर से हाजरा तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है. पार्टी का कहना है कि वह लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए इस कथित दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ सड़कों से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ेगी.
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ईडी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस की याचिका के मुख्य आधार
मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: टीएमसी ने ईडी की कार्रवाई को अनुच्छेद 19 और 21 के तहत गोपनीयता का अधिकार और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव में भाग लेने के अधिकार का हनन.
पीएमएलए का दुरुपयोग: टीएमसी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत छापेमारी और जब्ती को वैध जांच से जुड़ा नहीं, बल्कि दुर्भावनापूर्ण बताया है.
चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप: टीएमसी ने अपनी राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तर पर ईडी की छापेमारी को 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी को बाधित करने और तोड़ने का प्रयास.
मनी लॉन्ड्रिंग जांच से कोई संबंध नहीं: टीएमसी ने अपनी याचिका में कहा है कि ईडी द्वारा I-PAC के दफ्तर से जब्त डेटा का मनी लॉन्ड्रिंग जांच से कोई संबंध नहीं है.
बिना नोटिस अवैध जब्ती: टीएमसी ने याचिका में कहा है कि ईडी ने संवेदनशील सामग्री की जब्ती से पहले कोई पूर्व सूचना या औचित्य नहीं दिया.
छापे का उद्देश्य राजनीतिक: टीएमसी का कहना है कि ईडी ने I-PAC के दफ्तर पर पीएमएलए के तहत नहीं बल्कि बंगाल चुनाव से जुड़े रणनीतिक दस्तावेजों की जब्ती के लिए यह कार्रवाई की.
लोकतंत्र के लिए खतरा: टीएमसी ने अपनी याचिका में कहा है कि रराजनीतिक दल लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं और उन्हें बिना दबाव या धमकी के काम करने का अधिकार होना चाहिए.
मुनीष पांडे