तेलंगाना सरकार का बड़ा फैसला, मंत्रियों की कटेगी 50% सैलरी, 14,000 करोड़ के बकाया भुगतान का बना प्लान

रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली तेलंगाना कैबिनेट ने फैसला किया है कि मंत्री सरकारी कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित सेवानिवृत्ति बकाया के भुगतान के लिए संसाधन जुटाने में मदद करने के लिए अपने वेतन में स्वेच्छा से 50% की कटौती करेंगे.

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तेलंगाना में मंत्रियों की कटेगी आधी सैलरी. (File photo: ITG) तेलंगाना में मंत्रियों की कटेगी आधी सैलरी. (File photo: ITG)

सुमी राजाप्पन

  • हैदराबाद,
  • 25 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:07 AM IST

तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कल्याण के लिए एक मिसाल पेश की है. मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रियों के वेतन में 50% की स्वैच्छिक कटौती करने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 14,000 करोड़ रुपये के बकाया को 100 दिनों के अंदर निपटाने के लिए एक ठोस एक्शन प्लान को मंजूरी दी है.

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दरअसल, राज्य सरकार वर्तमान में भारी वित्तीय बोझ और लगभग 14,000 करोड़ रुपये की देनदारियों का सामना कर रही है, जिसमें से 8,000 करोड़ रुपये पेंशनभोगियों और 6,200 करोड़ रुपये सेवारत कर्मचारियों के बकाया हैं. पिछली सरकार के समय से रुके इन भुगतानों को सुनिश्चित करने के लिए कैबिनेट ने 100 दिनों की एक कार्य योजना तैयार की है. सरकार ने इसके साथ ही केलेश्वरम परियोजना की सीबीआई जांच तेज करने और गच्चीबोवली स्टेडियम को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले भी लिए हैं. संसाधनों की कमी को देखते हुए मंत्रियों ने खुद पहल कर ये वित्तीय योगदान देने का संकल्प लिया है.

गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपने हक के पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. 

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सरकार ने स्पष्ट किया कि जब तेलंगाना राज्य बना था, तब कोई बकाया नहीं था, लेकिन अब ये राशि बहुत बढ़ गई है. सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 8,000 करोड़ रुपये के भुगतान को प्राथमिकता देते हुए एक संसाधन जुटाव उप-समिति बनाई गई है. ये समिति कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संघों से बात कर समाधान निकालेगी. मंत्रियों के 50% वेतन कटौती के बाद अब अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी इसी तरह के उपायों पर विचार किया जा सकता है.

कालेश्वर प्रोजेक्ट

इसके अलावा कैबिनेट में कई मुद्दों पर चर्चा की और कई फैसले लिए. कैबिनेट ने कालेश्वरम परियोजना पर जस्टिस पी.सी. घोष आयोग की रिपोर्ट और हाई कोर्ट के हालिया फैसले पर भी चर्चा की.

अदालत ने आयोग की वैधता को बरकरार रखा है. हालांकि, प्रक्रियात्मक कमियों की ओर इशारा किया है. सरकार ने पाया कि सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के नौ महीने बाद भी जांच शुरू नहीं हुई है. अब राज्य सरकार दिल्ली के कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार करेगी और सीबीआई से जांच में तेजी लाने की अपील करेगी.

गच्चीबोवली स्टेडियम बनेगा स्पोर्ट्स हब

बैठक में हैदराबाद के गच्चीबोवली स्टेडियम को लेकर एक बड़ा विजन पेश किया गया है. इसे पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा. 76 एकड़ में फैले इस परिसर के 64 एकड़ हिस्से में 21 खेलों के लिए सुविधाएं बनाई जाएंगी. स्टेडियम की क्षमता 20,000 से बढ़ाकर 50,000 की जाएगी और यहां एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी भी स्थापित होगी. बाकी 12 एकड़ जमीन का व्यावसायिक उपयोग होगा, जिससे होने वाली आय को खेलों और एथलीटों के विकास पर खर्च किया जाएगा.

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इसके अलावा मंथनी निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की पुरानी मांग को पूरा करते हुए कैबिनेट ने चिन्ना केलेश्वरम परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को हरी झंडी दे दी है. इसके लिए 166.67 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिससे 45,000 एकड़ जमीन को सिंचाई का लाभ मिलेगा. साथ ही मंचेरियल जिले के हाजीपुर में श्रीपदा येल्लमपल्ली परियोजना के पास एक एकीकृत एक्वा पार्क स्थापित करने के लिए 85.10 एकड़ जमीन आवंटित की गई है.

RTC कर्मचारियों से अपील

कैबिनेट ने आरटीसी (RTC) कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और बातचीत का रास्ता चुनने की अपील की है. डिप्टी सीएम के नेतृत्व में एक आधिकारिक समिति उनकी समस्याओं को सुनने के लिए तैयार है.

इसके साथ ही, जिन प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, वहां नामांकन के माध्यम से शासी निकायों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है. सरकार का ये पूरा रोडमैप वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

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