'आधी रात को ड्राफ्ट करते हो ऐसी याचिकाएं?' प्याज-लहसुन पर PIL देख भड़का सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक वकील द्वारा दायर पांच 'निराधार' जनहित याचिकाओं (PIL) को खारिज कर दिया. इनमें प्याज और लहसुन में 'तामसिक' ऊर्जा की जांच की मांग वाली याचिका भी शामिल थी. कोर्ट ने वकील की खिंचाई करते हुए पूछा कि क्या वे ऐसी याचिकाएं आधी रात को तैयार करते हैं. कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता वकील न होते तो भारी जुर्माना लगाया जाता.

Advertisement
प्याज-लहसुन पर याचिका देख भड़के CJI.(File photo: ITG) प्याज-लहसुन पर याचिका देख भड़के CJI.(File photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:55 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक वकील द्वारा दायर पांच 'फ्रिवोलस' (निराधार) जनहित याचिकाओं (PIL) को खारिज कर दिया. इन याचिकाओं में से एक याचिका में प्याज और लहसुन में 'तामसिक' (नकारात्मक) ऊर्जा होने की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की थी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वकील सचिन गुप्ता को फटकार लगाते हुए पूछा, आधी रात को ये सब याचिकाएं ड्राफ्ट करते हो क्या?'

Advertisement

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमलया बागची की पीठ ने वकील को फटकार लगाई और कहा कि ये याचिकाएं 'अस्पष्ट, फ्रिवोलस और निराधार' हैं. पीठ ने कहा कि गुप्ता ने एक के बाद एक ऐसी याचिकाएं दायर की हैं, जिनमें कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है.

याचिकाकर्ता ने अपनी प्याज-लहसुन वाली याचिका में जैन समुदाय की आहार परंपराओं का हवाला दिया गया था, जहां जैन लोग प्याज, लहसुन और जड़ वाली सब्जियों को 'तामसिक' मानकर परहेज करते हैं. याचिका में मांग की गई थी कि एक समिति बनाई जाए जो जांच करे कि प्याज और लहसुन में क्या 'तामसिक' या नकारात्मक सामग्री है.

इस पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने वकील से पूछा, 'आप जैन समुदाय की भावनाओं को ठेस क्यों पहुंचाना चाहते हैं?' सचिन ने जवाब दिया कि ये एक सामान्य मुद्दा है और गुजरात में कथित तौर पर प्याज के इस्तेमाल को लेकर एक तलाक का मामला सामने आया था.

Advertisement

'अगली बार ऐसी याचिका...'

सीजेआई ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, 'अगली बार ऐसी निराधार याचिका लेकर आए तो देखिएगा हम क्या करते हैं.' उन्होंने कहा कि अगर याचिकाकर्ता वकील न होता तो उन्हें भारी जुर्माना लगाया जाता.

4 अन्य याचिकाएं भी खारिज

साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता की उन चार अन्य जनहित याचिकाओं को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित रूप से हानिकारक सामग्री को विनियमित करने के निर्देश मांगे गए थे, दूसरी याचिका में उन्होंने संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण को सुनिश्चित करने के निर्देश मांगे गए थे, जबकि एक अन्य में शास्त्रीय भाषाओं की घोषणा पर दिशानिर्देश मांगे गए थे.

इन याचिकाओं को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि याचिकाओं में की गई प्रार्थनाएं अस्पष्ट थीं और उनका कोई उचित कानूनी आधार नहीं था.

कोर्ट ने कहा कि इन सभी याचिकाओं की फाइलिंग  बिना सोचे-समझे की गई थीं और इनका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता एक वकील नहीं होते तो उन पर भारी जुर्माना (कॉस्ट) लगाया जाता.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement