'यह सिर्फ लापरवाही नहीं, साजिश...', उत्तराखंड में वन भूमि पर कब्जे को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में वन भूमि पर अवैध कब्जों और निर्माण को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने मशीनरी और कब्जाधारियों के बीच मिलीभगत के संकेत जताए. कोर्ट ने दो सप्ताह में विस्तृत हलफनामा मांगा है, जिसमें अवैध कब्जे और निर्माणों का ब्यौरा हो.

Advertisement
उत्तराखंड में वन भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार  (Photo-ITG) उत्तराखंड में वन भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:40 AM IST

उत्तराखंड की वन भूमि पर अवैध कब्जों और निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा है कि यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं है, बल्कि राज्य मशीनरी और कब्जाधारियों के बीच संभावित मिलीभगत का संकेत देता है.

कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के अंदर एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करे, जिसमें अवैध निर्माणों का विवरण, जमीन का क्षेत्रफल और साइट प्लान शामिल हों. 

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि कितनी भूमि पर कब्जा हुआ और क्या इसमें अधिकारियों का मौन समर्थन रहा.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य के अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें बंद रखीं, जबकि वन भूमि पर कब्जा धीरे-धीरे बढ़ता रहा. कोर्ट ने इसे राज्य तंत्र की “लगातार और गंभीर लापरवाही” करार दिया.

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, लगभग 2866 एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जा हुआ है. इनमें से एक हिस्सा ऋषिकेश की पशुलोक सेवा समिति को लीज पर मिला था, जिसने उसे अपने सदस्यों में विभाजित किया. विवादों के बीच एक समझौता डिक्री पेश की गई, जिसे कोर्ट ने संदिग्ध और मिलीभगत वाली बताया.

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड: रुद्रपुर में धामी सरकार का बुलडोजर एक्शन, प्रशासन ने कब्जे में ली 8 एकड़ सरकारी जमीन

Advertisement

हालांकि 1984 में 594 एकड़ भूमि वन विभाग को वापस कर दी गई थी, इसके बावजूद 2001 के बाद निजी व्यक्तियों द्वारा कब्जे की सूचना मिली. कोर्ट ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया और कहा कि सरकार मूकदर्शक बनी रही.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी खाली वन भूमि तुरंत वन विभाग और जिला प्रशासन के कब्जे में ली जाएं. साथ ही, नए निर्माण और भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई है. इस मामले में अनुपालन रिपोर्ट 5 जनवरी तक दाखिल करने का भी आदेश दिया गया है.

इनपुट: पीटीआई

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement