जब चीन-अमेरिका की चालें फेल कर भारत ने 'जीत' लिया था सिक्किम

सिक्किम की जनता लोकतंत्र की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आई थी. त्रिपक्षीय समझौता हुआ और चुनाव के बाद नई सरकार का गठन हुआ. काजी लेनडुप दोरजी सिक्किम के पहले और आखिरी प्रधानमंत्री बने थे.

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चोग्याल को नजरबंद कर हुआ था जनमत संग्रह (File Photo: ITG) चोग्याल को नजरबंद कर हुआ था जनमत संग्रह (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:48 PM IST

सिक्किम के भारत में विलय के 51 साल पूरे हो रहे हैं. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के दौरे पर सिक्किम पहुंच रहे हैं. पीएम मोदी अपने इस सिक्किम दौरे के दौरान रोड शो करेंगे और राजधानी गंगटोक के पालजोर स्टेडियम से देश को संबोधित करेंगे. इस दौरान वह प्रदेश में करीब चार हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे. पीएम के दौरे से चर्चा में आए सिक्किम के उस ऑपरेशन की कहानी के पन्ने भी पलटे जाने लगे हैं, जिसके जरिये यह हिमालयी इलाका भारत का अभिन्न अंग बना था.

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दरअसल, सिक्किम की सत्ता पर साल 1642 से ही नामग्याल वंश का शासन था और यहां के राजा को चोग्याल कहा जाता था. अंग्रेजों की नजर भी इस इलाके पर थी. साल 1861 में अंग्रेजों और नामग्याल राजवंश के बीच समझौता हुआ, जिसके मुताबिक नामग्याल सिक्किम के शासक बने रहे और नियंत्रण अंग्रेजों के पास चला गया. साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ, तब चोग्याल ताशी नामग्याल ने सिक्किम को आजाद देश बनाने की मांग रख दी. अंग्रेजों ने नामग्याल की इस मांग पर कोई फैसला नहीं लिया और भारत सरकार के विवेक पर छोड़ दिया.

आजादी के समय सरदार पटेल ने छोटी-छोटी रियासतों को भारत में मिलाने का अभियान छेड़ रखा था. सरदार पटेल चाहते थे कि सिक्किम को भी भारत में मिला लिया जाए, लेकिन तब के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की राय इससे जुदा थी. पंडित नेहरू का मानना था कि अगर सिक्किम को भारत में मिलाया जाता है, तब चीन तिब्बत की आजादी कुचल सकता है. विलय का प्लान तब टाल दिया गया और बीच का रास्ता निकालते हुए एक समझौता हुआ. इस समझौते के मुताबिक सिक्किम को स्पेशल स्टेटस देने के साथ ही बाहरी आक्रमण से सुरक्षा, डिप्लोमेसी और कम्युनिकेशन की जिम्मेदारी भारत ने ले ली.

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चीन का बदला भूगोल

भारत में सिक्किम का विलय करने से पंडित नेहरू जिस कारण बच रहे थे, आखिरकार वही हुआ. चीन ने अक्टूबर, 1950 को तिब्बती सेना को शिकस्त दे दी. इसके बाद 23 मई 1951 को 17 सूत्रीय समझौते के साथ ही तिब्बत को चीन ने अपने में मिला लिया. भारत ने तिब्बत और दलाई लामा का समर्थन किया. चीन ने 1962 में भारत पर हमला कर दिया. चीन की चुंबी वैली से सिक्किम का बॉर्डर जुड़ा था. चीन इसका इस्तेमाल भारत में चिकन नेक की नाकेबंदी के लिए कर सकता है, ऐसी आशंकाओं ने सिक्किम की स्थिति को विमर्श के केंद्र में ला दिया. भारत ने जब सिक्किम के विलय की मुहिम शुरू की, चीन ने इसका विरोध किया. चीन ने इसकी तुलना 1968 में चेकोस्लोवाकिया पर रूसी आक्रमण से कर दी. 

अमेरिका की चाल

चीन की हरकतों पर नजर रखने के लिए अमेरिका भी एक्टिव हो गया. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए सिक्किम में एक्टिव हो गई. चोग्याल ताशी नामग्याल के बाद सत्ता संभालने वाले चोग्याल पालडेन थोंडुप नामग्याल की पत्नी होप कुक अमेरिकी नागरिक थीं. ऐसा कहा जाता है कि सीआईए की पहुंच चोग्याल के महल तक हो गई थी. भारत और सिक्किम के रिश्ते 1964 तक स्पेशल स्टेटस फॉर्मूले पर ही चलते रहे, लेकिन 1966 से इंदिरा गांधी की सरकार आने और सिक्किम की सत्ता पर चोग्याल पालडेन थोंडुप नामग्याल के काबिज होने के बाद चीजें बदलीं.

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चोग्याल ने भूटान की तरह स्वतंत्र देश का दर्जा मांगना शुरू कर दिया. चोग्याल अमेरिकी पत्नी की वजह से अमेरिका के सहयोग की उम्मीद थी. उन्होंने चीन और पाकिस्तान से भी खुलकर मदद मांगी.  हालांकि, उनकी उम्मीदें बेमानी साबित हुईं. चोग्याल को भड़काने में उनकी अमेरिकी पत्नी की बड़ी भूमिका मानी जाती है. होप कुक बाद में सिक्किम छोड़कर अमेरिका चली गई थीं. तब भारत सरकार की ओर से चोग्याल के साथ तैनात रहे बीएन दास से होप कुक ने कहा था- मेरे पति का खयाल रखिएगा. अब मेरी यहां कोई भूमिका नहीं है.

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साल 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध और अलग देश के रूप में बांग्लादेश के निर्माण के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सिक्किम की समस्या के स्थायी समाधान का फैसला कर लिया. साल 1973 आते-आते सिक्किम की जनता चोग्याल के खिलाफ सड़कों पर उतर आई. स्पेशल स्टेटस का राग अलापते हुए चोग्याल ने भारत से मदद मांगी. भारतीय सेना के हस्तक्षेप से हालात काबू हुए और समझौते में तय हुआ कि यहां चुनाव होंगे. साल 1974 में सिक्किम चुनाव में सिक्किम नेशनल कांग्रेस को बड़ी जीत मिली और चोग्याल समर्थित पार्टी सिर्फ एक सीट पर सिमट गई.

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सैन्य कार्रवाई और जनमत संग्रह

सिक्किम चुनाव के बाद चोग्याल विरोधी माने जाने वाले काजी लेनडुप दोरजी प्रधानमंत्री बने और  नए संविधान में चोग्याल की भूमिका सीमित हो गई. अप्रैल, 1975 में सिक्किम के प्रधानमंत्री की मांग पर भारतीय सेना ने चोग्याल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके ही महल में नजरबंद कर दिया. इसके तुरंत बाद हुए जनमत संग्रह में 97 फीसदी से अधिक लोगों ने भारत के साथ विलय के पक्ष में मतदान किया था.

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इसके बाद 23 अप्रैल को सरकार की ओर से सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया. यह बिल 26 अप्रैल को लोकसभा से पारित हो गया था. तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने 15 मई 1975 को इस बिल पर हस्ताक्षर कर दिए थे और सिक्किम औपचारिक रूप से भारत में शामिल हो गया था.

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