सिक्किम के गंगटोक से चौंकाने वाली कहानी सामने आई है. यहां 14 साल की एक लड़की ने खुद अपनी किडनैपिंग की साजिश रच डाली. इस पूरी कहानी ने न सिर्फ उसके परिवार को दहशत में डाल दिया, बल्कि पुलिस को भी कुछ समय के लिए उलझाकर रख दिया.
एजेंसी के अनुसार, घटना 13 मार्च की है, जब लड़की रोज की तरह स्कूल जाने के लिए घर से निकली, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी. परिवार वालों ने पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. मामला उस वक्त और गंभीर हो गया, जब परिवार को एक अनजान नंबर से कॉल आया.
फोन करने वाले ने दावा किया कि लड़की का अपहरण कर लिया गया है और उसकी रिहाई के लिए 3 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई. इतना ही नहीं, धमकी भी दी गई कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो लड़की की जान को खतरा हो सकता है. इस कॉल के बाद परिवार में हड़कंप मच गया और मामला तुरंत पुलिस के संज्ञान में लाया गया.
पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया. कॉल डिटेल्स और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए जांच आगे बढ़ाई गई. इसी दौरान पुलिस को पता चला कि लड़की पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में देखी गई है.
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सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत सिलिगुड़ी पहुंची और वहां सघन तलाश शुरू की. आखिरकार लड़की को सिक्किम नेशनलाइज्ड ट्रांसपोर्ट (SNT) बस टर्मिनस के पास अकेले घूमते हुए पाया गया. पुलिस ने उसे सुरक्षित हिरासत में लिया और वापस गंगटोक लाया गया.
जांच के दौरान जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया. शुरुआती पूछताछ में पता चला कि लड़की ने खुद ही अपनी किडनैपिंग की कहानी गढ़ी थी. उसने न सिर्फ फिरौती के कॉल किए, बल्कि रोने की आवाज में वॉइस नोट भी भेजे, ताकि मामला असली लगे और परिवार डरकर पैसे देने को मजबूर हो जाए.
जांच में सामने आया- लड़की ने खुद रचा था ड्रामा
पुलिस के मुताबिक, लड़की ने यह पूरा ड्रामा खुद ही रचा था और किसी बाहरी व्यक्ति की इसमें भूमिका नहीं पाई गई है. हालांकि, उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसका कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है और पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है.
पुलिस का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और काउंसिलिंग के जरिए लड़की को समझाने का प्रयास किया जाएगा. फिलहाल, लड़की सुरक्षित है और परिवार को सौंप दी गई है. पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें और उनकी मानसिक स्थिति पर ध्यान दें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.
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