भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ने वाले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को उनके असाधारण साहस और योगदान के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें जून 2025 में संपन्न ऐतिहासिक Axiom Mission-4 (Ax-4) के दौरान निभाई गई अहम भूमिका के लिए दिया गया है, जिसने चार दशकों बाद किसी भारतीय की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर वापसी को संभव बनाया.
Ax-4 मिशन में दिखाया अद्वितीय साहस
25 जून 2025 को स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्षयान 'Grace' से लॉन्च हुए शुभांशु शुक्ला ने 18 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया, जिनमें से सात प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेतृत्व में किए गए. मिशन के दौरान उन्होंने पायलट के रूप में जटिल ऑर्बिटल मैन्युवर्स, डॉकिंग ऑपरेशन और माइक्रोग्रैविटी में संचालन जैसे उच्च जोखिम वाले कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया.
Ax-4 मिशन में भारत के साथ पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री भी शामिल थे. अंतरिक्षयान ने 26 घंटे की यात्रा के बाद ISS से सफलतापूर्वक डॉकिंग की. इस मिशन से प्राप्त अनुभव और डेटा भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन (2027) के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में चमके शुभांशु
लखनऊ निवासी 39 साल के शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के अधिकारी हैं और उन्हें 2019 में गगनयान मिशन के लिए चयनित किया गया था. उन्होंने रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कठोर प्रशिक्षण लिया. 15 जुलाई 2025 को सुरक्षित वापसी के बाद वो अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय के रूप में इतिहास में दर्ज हो गए. राकेश शर्मा (1984) अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय नागरिक थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा था कि उन्होंने अंतरिक्ष में भारत की आकांक्षाओं को नई ऊंचाई दी है. ISRO द्वारा इस मिशन के लिए किया गया निवेश भविष्य के भारतीय मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की मजबूत नींव माना जा रहा है. अशोक चक्र से सम्मानित होकर शुभांशु शुक्ला अब उन चुनिंदा अंतरिक्ष नायकों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने न केवल विज्ञान, बल्कि राष्ट्रीय गौरव को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है.
aajtak.in