कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को केंद्रीय बजट को 'निराशाजनक' और 'गंवाया हुआ अवसर' करार देते हुए इसकी तुलना एक ऐसी कार से की, जो क्रैश हो गई है और उसमें सिर्फ एयरबैग्स को फिर से व्यवस्थित कर दिया गया है, जबकि यात्रियों को आश्वासन दिया जा रहा है कि चेसिस मजबूत है और उन्हें बाद में बेहतर महसूस होगा. लोकसभा में बजट पर बहस शुरू करते हुए थरूर ने मिर्जा गालिब का शेर पढ़ा, 'हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है' और सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बजट की असली कमजोरी क्रियान्वयन में है. उन्होंने कहा कि बजट में किए गए वादों और हकीकत में कोई तालमेल नहीं है.
उन्होंने इसे 'हेडलाइन मैनेजमेंट' बताते हुए कहा कि वादे ऊंचे-ऊंचे किए जाते हैं, बजट बड़े दिखते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर डिलीवरी नदारद रहती है. उनके अनुसार, इस बजट में जो बातें शामिल नहीं की गईं, वही इसे सबसे ज्यादा कमजोर बनाती हैं. कांग्रेस सांसद ने कृषि क्षेत्र में किए गए वादों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र को लेकर की गई घोषणाएं इस जमाने के लव अफेयर जैसी हैं, वादे बड़े-बड़े लेकिन कमिटमेंट जीरो. शशि थरूर ने तंज कसते हुए कहा कि यह बजट उस मैकेनिक जैसा है जो गाड़ी का ब्रेक ठीक न कर पाने पर हॉर्न का साउंड बढ़ा देता है.
यह भी पढ़ें: शशि थरूर की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने US डील पर मांगी जानकारी, अधिकारियों को किया तलब
शशि थरूर ने कहा कि यह बजट बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ती असमानता जैसी समस्याओं को नजरअंदाज करता है और आम आदमी की वास्तविक चुनौतियों को हल करने में असफल है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भले ही कल्याणकारी योजनाओं की बात करती हो, लेकिन खर्च के आंकड़े प्रशासनिक विफलता और योजनाओं के कम उपयोग की कहानी बताते हैं. उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं में आवंटित धन के कम खर्च का हवाला देते हुए कहा कि यह सुशासन नहीं, बल्कि केवल सुर्खियां बटोरने की राजनीति है. थरूर ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ एक सराहनीय लक्ष्य है, लेकिन इस बजट में उसे हासिल करने का कोई विश्वसनीय रोडमैप नहीं दिखता.
थरूर ने कहा कि इस बजट की प्रशंसा संयम के लिए की जा रही है, लेकिन बिना विजन और निष्पक्षता के संयम खोखला होता है. उन्होंने कहा कि यह बेरोजगारी, बढ़ती जीवन-यापन लागत और असमानता को नजरअंदाज करता है और आम आदमी की वास्तविक परेशानियों और आकांक्षाओं के लिए कोई हल नहीं पेश करता. शशि थरूर ने कहा कि यह सरकार बार-बार कल्याण की बात करती है, लेकिन खर्च की कहानी बिल्कुल अलग है. उन्होंने आंकड़े दिए, 'पिछले साल 53 प्रमुख कल्याण और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के लिए 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक बजट रखा गया था, लेकिन पहले 9 महीनों में महज़ 41% खर्च हुआ.'
यह भी पढ़ें: VIDEO: 'जिस दीये को तूफां में जलना होगा...', संसद की सीढ़ियों पर फिसले शशि थरूर, शायरी में लिखा- मैं ठीक हूं
शशि थरूर ने आगे बताया कि जल जीवन मिशन के लिए 67,000 करोड़ आवंटित, 9 महीने में केवल 31 करोड़ खर्च. पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया के लिए 7500 करोड़ में से सिर्फ 473 करोड़ खर्च. सबसे चौंकाने वाला प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के लिए 2,140 करोड़ में से महज 40 करोड़ खर्च होना है. अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि असली विकसित भारत नारों से नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने वाले परिणामों से बनेगा. वादों को हकीकत में बदलना कोई एहसान नहीं, बल्कि सरकार का कर्तव्य है.
aajtak.in