'दो साल में दूसरी मैटरनिटी लीव संभव', इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

यह मामला मनीषा यादव की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने 4 अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी दूसरी मातृत्व अवकाश की मांग खारिज कर दी गई थी.

Advertisement
मैटरनिटी लीव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा. (प्रतीकात्मक तस्वीर). मैटरनिटी लीव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा. (प्रतीकात्मक तस्वीर).

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:43 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव को लेकर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि दूसरे मातृत्व अवकाश को सिर्फ इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि वह पहली मैटरनिटी लीव के दो साल के भीतर मांगी गई है. 

कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत मिलने वाले अधिकार वित्तीय हैंडबुक के प्रावधानों से ऊपर होते हैं. यह आदेश जस्टिस करुणेश सिंह पवार ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सुनवाई के दौरान दिया. 

Advertisement

यह मामला मनीषा यादव की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने 4 अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी दूसरी मातृत्व अवकाश की मांग खारिज कर दी गई थी. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि मैटरनिटी बेनेफिट एक्ट, 1961 एक लाभकारी कानून है इसलिए इसके प्रावधानों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

वहीं, राज्य सरकार ने वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) का हवाला देते हुए कहा कि दो मातृत्व अवकाश के बीच कम से कम दो साल का अंतर जरूरी है. अदालत ने पहले के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम, जो संसद द्वारा बनाया गया कानून है. किसी भी कार्यकारी निर्देश या वित्तीय हैंडबुक के प्रावधानों पर भारी पड़ेगा. अगर दोनों में टकराव होता है, तो इस अधिनियम के प्रावधान ही लागू होंगे.

कोर्ट ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता का पहला बच्चा 2021 में हुआ था और उन्होंने 2022 में दूसरी मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, जिसे गलत आधारों पर खारिज कर दिया गया. अदालत ने उस आदेश को रद्द कर दिया और संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि मनीषा यादव को छह अप्रैल 2026 से 2 अक्टूबर 2026 तक मातृत्व अवकाश दिया जाए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement