'ब्लैकमेलिंग के लिए बनते हैं ऐसे दल...', EC के फैसले को चुनौती देने वाली पार्टी को SC से झटका

सुप्रीम कोर्ट ने क्षेत्रीय दल 'अखिल भारतीय राष्ट्रवादी शिव सेना' के रजिस्ट्रेशन रद्द करने के चुनाव आयोग के फैसले को सही ठहराया है. अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी पार्टियां अक्सर केवल शोषण और ब्लैकमेलिंग के उद्देश्य से बनाई जाती हैं. चुनाव न लड़ने के आधार पर ये कार्रवाई की गई है.

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EC के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज.  (File Photo- PTI) EC के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज. (File Photo- PTI)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:07 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय राष्ट्रवादी शिवसेना नामक एक 'क्षेत्रीय पार्टी' की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा उसके पंजीकरण रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने इस तरह की पार्टियों को 'ब्लैकमेलिंग और शोषण' के लिए बनाई गई पार्टियां करार देते हुए कड़ी टिप्पणी की.

सुनवाई के दौरान जस्टिस जे. बागची ने पार्टी के वकील से सवाल किया कि यदि आपने 2023, 2024 या 2025 में कोई चुनाव नहीं लड़ा तो आप ये कैसे दावा कर सकते हैं कि आपका पंजीकरण गलत तरीके से रद्द किया गया? वकील ने जवाब दिया कि पार्टी ने 2022 में पंजाब और 2023 में केरल में चुनाव लड़ा था.

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इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) ने सख्त लहजे में कहा, 'हमें ओपन कोर्ट में ये सब न कहने दें. इस तरह की पार्टियां सिर्फ ब्लैकमेलिंग और शोषण के लिए बनाई जाती हैं, ताकि आप खुद को पार्टी कह सकें.'

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पार्टी लंबे वक्त तक चुनाव नहीं लड़ती या सक्रिय नहीं रहती तो चुनाव आयोग द्वारा उसके पंजीकरण को रद्द करना बिल्कुल सही है. अखिल भारतीय राष्ट्रवादी शिवसेना ने दावा किया था कि उसका पंजीकरण गलत तरीके से रद्द किया गया, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि ऐसी पार्टियां वास्तविक राजनीतिक गतिविधि के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए बनाई जाती हैं.

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