देश में अवैध रेत खनन का जिन्न एक बार फिर पूरी ताकत से बाहर आ चुका है. राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में रेत माफिया का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब न सिर्फ आम लोग, बल्कि पुलिस और वन विभाग के अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं. आजतक की जांच में सामने आया है कि बीजेपी शासित दोनों राज्यों में रेत माफिया खुलेआम दिनदहाड़े अवैध खनन और परिवहन कर रहा है.
हालात इतने गंभीर हैं कि बीते एक हफ्ते में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक वनकर्मी ड्यूटी पर तैनात था. कई जिलों में अधिकारी कार्रवाई करने से डर रहे हैं और स्थानीय लोग पर्यावरण तबाही को लेकर दहशत में जी रहे हैं.
राजस्थान के धौलपुर जिले से सबसे चौंकाने वाला मामला सामने आया. यहां चंबल नदी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन रोकने गए वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया. घटना 8 जनवरी की रात की है, जब वन विभाग की टीम चंबल वन्यजीव क्षेत्र में गश्त कर रही थी.
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ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक ने भागने के दौरान वनकर्मी को टक्कर मार दी. गंभीर हालत में उन्हें पहले करौली और फिर जयपुर रेफर किया गया, जहां पैर काटना पड़ा, लेकिन 10 जनवरी की रात उनकी मौत हो गई. वन विभाग के मुताबिक, आरोपी माफिया मौके से फरार हो गया था. बाद में पुलिस ने बजरी माफिया रामसेवक उर्फ चालू को गिरफ्तार किया. इसके बाद प्रशासन ने जेसीबी से अवैध रास्तों को खोदकर बंद किया, लेकिन सवाल यही है कि क्या ये कार्रवाई स्थायी है?
अजमेर: अलर्ट मोड पर प्रशासन, सख्त चेतावनी
धौलपुर की घटना के बाद अजमेर प्रशासन हरकत में आया. जिला कलेक्टर लोकबंधु ने अवैध खनन के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए. खनिज, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बनाई गईं. पुष्कर, केकड़ी और सीमावर्ती इलाकों में नाकेबंदी की गई. कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त कर लाखों का जुर्माना लगाया गया और दोबारा पकड़े जाने वालों पर एफआईआर दर्ज की गई. प्रशासन का कहना है कि अब किसी भी कीमत पर अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे उलट नजर आती है.
अलवर: अरावली की पहाड़ियां हो रहीं खत्म
अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों को रेत और पत्थर माफिया खोखला कर रहे हैं. राजगढ़ क्षेत्र के मूनपुर गांव में बालाजी मंदिर के पास खुलेआम पत्थर खनन चल रहा है. आजतक की टीम ने देखा कि सुबह होते ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खनन में जुट जाती हैं. भारी वाहन सड़कों से गुजरते हैं, लेकिन न पुलिस रोकती है और न वन विभाग.
जब पुलिस ने पीछा किया तो माफिया ने एक घर की नींव तक तोड़ दी, जिससे तीन बकरियों की मौत हो गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि माफिया को कानून का कोई डर नहीं है और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है.
बारां: अवैध बजरी मंडी पर छापा
बारां शहर में पुलिस ने अंबेडकर सर्किल के पास अवैध बजरी बाजार पर बड़ी कार्रवाई की. 12 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ी गईं, जिनमें से 8 अवैध पाई गईं. हालांकि चार बिना रजिस्ट्रेशन वाली ट्रॉलियों को जांच के बाद छोड़ दिया गया, जिस पर सवाल उठ रहे हैं. गांव वालों का आरोप है कि खनन बस्ती से महज 100 मीटर दूर हो रहा है, ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आ गई हैं और शिकायतों के बावजूद प्रशासन चुप है.
मध्य प्रदेश: रेत माफिया बनाम कानून
श्योपुर: वन विभाग पर पथराव, मां-बेटे को कुचला
राजस्थान के बाद अब मध्यप्रदेश की बात करते हैं, जहां श्योपुर जिले में चंबल अभयारण्य की टीम ने एक अवैध रेत से भरा डंपर पकड़ा. डंपर जब्त कर ले जाते वक्त माफिया ने पथराव कर दिया और वाहन छुड़ाने की कोशिश की. पांच लोगों पर केस दर्ज हुआ. इसी जिले के विजयपुर इलाके में तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बाइक सवार बेटे को कुचल दिया, मां गंभीर रूप से घायल हो गई. आरोपी चालक फरार है और खबर लिखे जाने तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.
रतलाम: पुलिस पर हमला, बीजेपी पार्षद गिरफ्तार
रतलाम में अवैध परिवहन की सूचना पर पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली रोकी. तभी 15 से ज्यादा बदमाश पहुंचे और पथराव शुरू कर दिया. ट्रॉली पलटने से एक पुलिसकर्मी दब गया. इस मामले में बीजेपी पार्षद जगदीश प्रजापत को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. बाकी आरोपी फरार हैं और खबर लिखे जाने तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं.
मुरैना: चंबल में चौबीसों घंटे खनन
मुरैना और भिंड चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन का सबसे बड़ा गढ़ बने हुए हैं. दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चंबल नदी से रेत निकालकर बेच रही हैं. खनिज विभाग की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है. अधिकारी कहते हैं कि शिकायत मिलने पर जांच होती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है.
जबलपुर: अफसरों को कुचलने की धमकी
जबलपुर में अवैध खनन की जांच करने पहुंचे तहसीलदार और खनिज विभाग की टीम को माफिया ने ट्रक से कुचलने की धमकी दी. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. खनन कारोबारी रोहित जैन को गिरफ्तार किया गया, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे लोग इतने बेखौफ कैसे हैं.
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सवाल वही: माफिया इतना ताकतवर क्यों?
आजतक की इस जांच में साफ है कि अवैध रेत खनन अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था का बड़ा संकट बन चुका है. जब अफसरों की जान सुरक्षित नहीं, तो आम लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे. सरकारें कार्रवाई के दावे कर रही हैं, लेकिन जब तक माफिया पर स्थायी और सख्त शिकंजा नहीं कसा जाता, तब तक चंबल, अरावली और नर्मदा यूं ही लुटती रहेंगी.
(भोपाल से रवीश पाल सिंह, अजमेर से चंद्रशेखर शर्मा, अलवर से हिमांशु शर्मा, मोरेना से हेमंत शर्मा, जबलपुर से धीरज शाह, धौलपुर से उमेश मिश्रा के इनपुट के साथ)
आजतक ब्यूरो