TV मैकेनिक ने 2 बच्चों को यूक्रेन में पढ़ाकर बनाया डॉक्टर, तीसरा बेटा बिना डिग्री लौटा

Russia Ukraine War: दिल्ली एयरपोर्ट पर भारतीय छात्रों का संकटग्रस्त यूक्रेन से आना जारी है. भारत सरकार ऑपरेशन गंगा के तहत अपने नागरिकों को स्वदेश वापस ला रही है.

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यूक्रेन से लौटे बेटे का स्वागत करते अभिभावक. यूक्रेन से लौटे बेटे का स्वागत करते अभिभावक.

मनीष चौरसिया

  • नई दिल्ली,
  • 04 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 9:01 AM IST
  • ऑपरेशन गंगा के तहत स्वदेश लाए जा रहे भारतीय बच्चे
  • यूक्रेन में फंसे थे हजारों भारतीय छात्र
  • मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं यूक्रेन

दिल्ली एयरपोर्ट पर इंतज़ार करते राजकुमार गुप्ता वेशभूषा से ही बेहद साधारण दिखते हैं. राजकुमार अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर खड़े हैं. हाथ में एक पॉलिथिन है जिसमें फूल और माला रखे हुए हैं और दूसरे हाथ में मिठाई का डिब्बा है. दरअसल राजकुमार गुप्ता का सबसे छोटा बेटा निखिल किसी तरह यूक्रेन से जान बचाकर भारत आ गया है. गुरुवार देर रात लगभग 11:15 बजे उनका बेटा निखिल सामने से आता हुआ दिखाई पड़ता है और पूरे परिवार का चेहरा खिल उठता है. निखिल की मां की आंखों में आंसू हैं, तो पिता राजकुमार के चेहरे पर खुशी है. मेडिकल स्टूडेंट निखिल यूक्रेन से लौटे हैं. उनकी कहानी जरूरी है, लेकिन उनके पिता राजकुमार गुप्ता की कहानी एक पिता के रूप में कहीं ज्यादा दिलचस्प है.

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राजकुमार गुप्ता टीवी रिपेयर करने का छोटा-सा काम करते हैं. दिल्ली के बुराड़ी में रहते हैं. राजकुमार गुप्ता के तीन बेटे हैं, अविनाश मोहित और निखिल. आप यह जानकर हैरान होंगे कि राजकुमार अपने तीन में से दो बेटे अविनाश और मोहित को डॉक्टर बना चुके हैं. अविनाश और मोहित ने भी यूके से डॉक्टरी की पढ़ाई की और आज वह इंडिया में डॉक्टर हैं. छोटी से काम के साथ बेटों को डॉक्टरी की पढ़ाई करवाना किसी जज्बे से कम नहीं था. 

राजकुमार बताते हैं कि उन्होंने गांव की जमीन और बाग बेच दिया. इस तरह दो बेटों को डॉक्टर बनाया. तीसरे बेटे निखिल को भी डॉक्टर बनाने के लिए उन्होंने यूक्रेन भेजा था. निखिल थर्ड ईयर का छात्र है. राजकुमार ने निखिल की पढ़ाई के लिए 60 लाख रुपये का लोन लिया है.

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संकटग्रस्त यूक्रेन से वापस लौटे निखिल के पिता राज कुमार कहते हैं,  उनका सपना था कि वह तीनों बेटों को डॉक्टर बनाएं. इसके लिए तीनों बच्चों को NEET का एग्जाम दिलवाया. बच्चों के अच्छे नंबर भी आए, लेकिन क्योंकि वह सामान्य कैटेगरी में आते हैं इसलिए उन्हें देश में मेडिकल की सीट नहीं मिल पाई. मजबूरन उन्हें अपने बच्चों को यूक्रेन भेजना पड़ा. इस मजबूरी के चलते राजकुमार अपनी बात में बार-बार देश में आरक्षण पर भी सवाल करने लगते हैं.

टीवी रिपेयर करने वाले पिता ने अपने बच्चे को यूक्रेन पढ़ने भेजा था.

वह कहते हैं कि देश में आरक्षण को लेकर सरकार को एक बार फिर से सोचना चाहिए. जो गरीब है उनको मदद मिलनी चाहिए ना कि धर्म और जाति के आधार पर. राज कुमार कहते हैं कि अगर वह सामान्य केटेगरी से नहीं होते तो उन्हें अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाई के लिए नहीं भेजना पड़ता और आज उनके सबसे छोटे बेटे की जान खतरे में ना पड़ती.

इतना खर्चा करने के बाद बेटे की डिग्री अब कैसे पूरी होगी? यह सवाल सुनकर राजकुमार ज्यादा परेशान नहीं होते और बेहद शांत मन से कहते हैं कि उन्हें मोदी सरकार पर पूरा भरोसा है. वह गरीब का पैसा और मेहनत खराब नहीं होने देंगे. उन्हें पूरी उम्मीद है कि मोदी सरकार उनके बेटे की पढ़ाई पूरी जरूर करवाएगी. वह मुस्कुराते हुए कहते हैं कि उनके दो बेटे डॉक्टर बन ही चुके हैं और तीसरे बेटे को भी डॉक्टर बनाकर वह अपना सपना जरूर पूरा करेंगे.

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