कभी PM मोदी के साथ, कभी चीफ गेस्ट को समझाते दिखे... VIP मंच पर कौन है ये शख्स

गणतंत्र दिवस परेड के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ दिखने वाले एक शख्स को लेकर सबकी जुबान पर एक ही सवाल था- इनका परिचय क्या है? इस शख्स को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हुई.

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सिद्धार्थ बाबू 2017 बैच के IFS ऑफिसर हैं. (Photo: ITG) सिद्धार्थ बाबू 2017 बैच के IFS ऑफिसर हैं. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:51 PM IST

कर्तव्य पथ पर झाकियों का सुंदर विवरण प्रस्तुत करते, चुनिंदा शब्दों का अर्थ बताते, भारतीय संस्कृति से विदेशी मेहमान का परिचय कराते एक युवा की तस्वीर आपने सोमवार को जरूरत देखी होगी. ये तस्वीर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कई बार दिख रही थी, कभी टीवी पर, कभी मोबाइल पर तो कभी रील के बीच में.  

ये युवा कभी मुख्य अतिथि यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से बात कर रहे तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संवाद कर रहे थे. कभी कभी तो इन्हें दोनों के बीच देखा गया. कुछ देर बाद लोगों को ये तो समझ में आ गया कि ये पीएम मोदी और चीफ के बीच इंटरप्रेटर या अनुवादक का काम कर रहे थे. लेकिन इनका परिचय किसी को नहीं पता था. 

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दरअसल वीवीआईपी के बीच दिखने वाले ये युवा भारतीय विदेश सेवा के 2017 बैच के अधिकारी सिद्धार्थ बाबू हैं. सिद्धार्थ बाबू 26 जनवरी की परेड में बेहद जरूरी दायित्व निभा रहे थे. 

सिद्धार्थ बाबू विदेश मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत है. वह प्रोटोकॉल/इंटरप्रेटेशन के काम में भी अक्सर शामिल होते हैं. सिद्धार्थ बाबू ने अमेरिका के प्रतिष्ठित Middlebury Institute of International Studies, Monterey से भाषा की पढ़ाई की है. यहां न सिर्फ भाषा का ज्ञान सिखाया जाता है, बल्कि अफसरों को कूटनीतिक और डिप्लोमैटिक शिष्टाचार भी सिखाया जाता है. 

ये डिग्री उन्हें  उन्हें ऐसे हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में इंटरप्रेटर के रूप में फिट बनाती है. 

सिद्धार्थ बाबू को मंडेरिन भाषा का भी जानकारी है. 

मिडिलबरी संस्थान के एक लेख में सिद्धार्थ बाबू ने कहा है, "एक डिप्लोमैट के तौर पर, हम कल्चर के बीच पुल का काम करते हैं. मुझे लगा कि यह ज़िंदगी में करने लायक एक अच्छा काम है. यह आपको बिज़ी रखता है." 

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"इससे बहुत फर्क पड़ता है. अगर आप किसी भाषा की बारीकियों को नहीं समझते, तो आप सच में यह नहीं समझ पाते कि सामने वाला क्या कहना चाह रहा है. भाषा में बहुत सारा छिपा हुआ मतलब होता है. डिप्लोमैट, इंटरप्रेटर और बातचीत को आसान बनाने वालों के तौर पर, यह बहुत ज़रूरी है."

सिद्धार्थ बाबू कहते हैं, "यह आपको हमेशा ज़्यादा सीखने और हर समय विनम्र और जिज्ञासु बने रहने के लिए प्रेरित करता है.यह बहुत चुनौतीपूर्ण और मुश्किल है."

सोशल मीडिया पर मिली तारीफ

सिद्धार्थ बाबू को अपने काम के लिए सोशल मीडिया पर काफी तारीफ मिली है. एक यूजर ने लिखा, "गणतंत्र दिवस के मंच पर ग्लोबल लीडर्स के साथ ट्रांसलेटर की सधी हुई प्रस्तुति ने कर्तव्य पथ पर भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक कहानी को बताने में अहम भूमिका निभाई."

 

एक यूजर ने लिखा, "आज की गणतंत्र परेड में सबसे मुश्किल काम. ट्रांसलेटर का. चीफ गेस्ट और माननीय प्रधानमंत्री के साथ.

एक शख्स ने कहा कि, "ट्रांसलेटर को धन्यवाद, गणतंत्र दिवस के मंच पर वैश्विक नेताओं के साथ शांत और संतुलित अंदाज में संवाद."

टॉपर रहे हैं सिद्धार्थ बाबू

कोच्चि के रहने वाले सिद्धार्थ बाबू ने साल 2016 में अपने दूसरे प्रयास में UPSC की परीक्षा पास की थी. इस परीक्षा में सिद्धार्थ ने 15वीं रैंक हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने भारतीय विदेश सेवा का चयन किया. 

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