गृह मंत्रालय के किस प्रस्ताव को रेल मंत्रालय ने ठुकराया

यह प्रस्ताव केंद्रीय रिजर्व पुलिसबल की ओर से गृह मंत्रालय को भेजा गया था, जिसे गृह मंत्रालय ने रेल मंत्रालय के समक्ष रखा. लेकिन रेलवे बोर्ड ने अपने जवाब में इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई. रेल मंत्रालय ने वित्तीय और अन्य कारणों का हवाला देकर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. 

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रेल भवन रेल भवन

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 5:26 PM IST

रेल मंत्रालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें राष्ट्रपति वीरता पुरस्कारों के विजेताओं और दिवंगत विजेताओं की विधवाओं को राजधानी और शताब्दी ट्रेनों में निशुल्क सफर करने की मंजूरी देने को कहा था

यह प्रस्ताव केंद्रीय रिजर्व पुलिसबल (सीआरपीएफ) की ओर से गृह मंत्रालय को भेजा गया था, जिसे गृह मंत्रालय ने रेल मंत्रालय के समक्ष रखा. लेकिन रेलवे बोर्ड ने अपने जवाब में इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई. रेल मंत्रालय ने वित्तीय और अन्य कारणों का हवाला देकर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. 

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बता दें कि इससे पहले वीरता पुरस्कार विजेताओं और उनकी विधवाओं को साल में एक बार ट्रेन में निशुल्क यात्रा कराई जाती थी.

जानकारी के लिए बता दें कि इस साल CRPF के जांबाजों को सबसे ज्यादा वीरता पुरुस्कार मिले हैं. 48 पुलिस मेडल CRPF जवानों को दिए गए हैं. इसके अलावा 14 पुलिस मेडल ऑफ गैलेंट्री भी बांटे गए हैं. वहीं इन पुरस्कारों के साथ 29 परम विशिष्ट सेवा मेडल दिए गए हैं, 3 उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 32 अति विशिष्ट सेवा मेडल, 8 युवा सेवा मेडल, 92 सेना मेडल, 79 विशिष्ट सेवा मेडल दिए गए हैं.

बार टू विशिष्ट सेवा मेडल भी 2 जांबाजों को दिया गया है. दिवंगत कमांडर निशांत सिंह को नवंबर 2020 में मिग-29 के विमान दुर्घटना में अपने प्रशिक्षु पायलट की जान बचाने के लिए नौसेना पदक (शौर्य) (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया.

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अब हर सम्मान का अपना महत्व है, अपनी कहानी है. शौर्य चक्र की बात करें तो दुश्मन का डट कर सामना करने के लिए यह सम्मान जीवित या मृत योद्धा को दिया जाता है. यह सम्मान थल, वायु या नौसेना के किसी भी पुरुष या महिला को, या फिर किसी रिजर्व बल, टेरिटोरियल आर्मी के जवान को उसकी बहादुरी के लिए मिल सकता है. इसके अलावा आर्म्ड फोर्सेस की नर्सिंग सर्विस को भी यह सम्मान दिया जाता है.

कीर्ति चक्र तीनों सेनाओं के उन जवानों, आर्म्ड फोर्सेस की मेडिकल टीम या रिजर्व बल, टेरिटोरियल आर्मी आदि के जवानों को दिया जाता है जो जब दुश्मन के सामने बहादुरी दिखाते हैं. वहीं बहादुरी की सारी सीमाएं पार करके दुश्मन को मौत के घाट उतारने वाले या फिर किसी युद्ध का दिशा बदलने वाले 'परमवीर' योद्धाओं को यह सम्मान दिया जाता है. इस मेडल पर चार 'इंद्र के वज्र' बने होते हैं.

 

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