'बोलत हईं, दू मिनट रुका...', मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज ने बोली भोजपुरी तो वायरल हो गया VIDEO

उत्तर प्रदेश की मछलीशहर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर सरकार का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे को उलझाया जा रहा है और बिना डीलिमिटेशन के तुरंत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए.

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सांसद प्रिया सरोज ने महिला आरक्षण को परिसीमन बिल से अलग करने की मांग की सांसद प्रिया सरोज ने महिला आरक्षण को परिसीमन बिल से अलग करने की मांग की

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:33 PM IST

उत्तर प्रदेश के मछलीशहर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी सांसद प्रिया सरोज ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान सरकार का घेराव किया. सपा सासंद ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे को लगातार उलझाया जा रहा है. उन्होंने सवाल किया कि अभी 543 लोकसभा सीटों के आधार पर महिला आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा है. विधानसभा चुनावों के बीच इस बिल को पेश किए जाने की टाइमिंग को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए.

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चर्चा में प्रिया सरोज का भाषण
उनके भाषण के दौरान आसन पर मौजूद पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने उनके समय खत्म होने की तरफ इशारा किया तो प्रिया सरोज ने कहा- रुका. भोजपुरी में उनकी सहजता और सरल भाव पर मौजूद सदस्य भी मुस्कुराने लगे. उनके भाषण की खूब चर्चा हो रही है.

प्रिया सरोज ने कहा कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं. हम इसकी अप्रोच के खिलाफ हैं. बिना डीलिमिटेशन के लागू करिये और तुरंत आरक्षण दीजिए. इस दौरान उन्होंने पीठासीन से भोजपुरी में कहा- बोलत हईं, दू मिनट रुका. बाद में पीठासीन ने भी भोजपुरी में ही कहा- कुल्ह बात आ गइल. इससे पहले, प्रिया सरोज ने कहा कि पुराने आंकड़ों से नया इतिहास नहीं लिखा जाता.

2011 की जनगणना के आधार पर नया परिसीमन की बात है और परिसीमन का अधिकार भी सरकार को दे दिया गया है. पहले हर जनगणना के बाद परिसीमन अनिवार्य होता था. अब सरकार जब चाहे, परिसीमन करा सकते हैं.

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'हम महिला आरक्षण के पक्ष में लेकिन..'
प्रिया सरोज ने कहा कि हम सब महिला आरक्षण बिल के सपोर्ट में थे, हैं और रहेंगे. उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या यह बिल सच में महिला को सशक्त करने के लिए है? क्या यह महिलाओं के नाम पर कुछ राजनीतिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए है? महिलाओं के नाम पर सारे एजेंडा ही बदल दिया. नीति अगर साफ होती है तो कब का यह लागू हो चुका होता.

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