प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में शिफ्ट करने जा रहे हैं. यह कदम केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो प्रशासनिक तालमेल और कार्यों को बेहतर ढंग से करने के लिए बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है.
नई व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय अब ‘सेवा तीर्थ-1’ भवन में संचालित होगा, जो कार्यपालिका परिसर-1 में वायु भवन के समीप स्थित है. इसी परिसर में ‘सेवा तीर्थ-2’ और ‘सेवा तीर्थ-3’ भवन भी हैं. सितंबर 2025 से पहले ही ‘सेवा तीर्थ-2’ में कैबिनेट सचिवालय शिफ्ट हो चुका है, जबकि ‘सेवा तीर्थ-3’ में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय का कार्यालय स्थापित किया जाएगा.
यह शिफ्टिंग ऐतिहासिक महत्व का है, क्योंकि आज़ादी के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में ही स्थित था. साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को खाली करने के बाद इन्हें ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे आम जनता भारत के प्रशासनिक और ऐतिहासिक सफर को समझ सकेगी.
करीब 1,189 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सेवा तीर्थ परिसर 226,203 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है और इसका निर्माण लार्सन एंड टूब्रो ने किया है. इसका डिज़ाइन ‘सेवा’ की थीम पर आधारित है, जिसमें आधुनिक कार्यस्थलों के साथ भव्य कक्ष भी शामिल हैं.
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सरकार का कहना है कि यह बदलाव कोलोनियल विरासत से आगे बढ़ने और प्रशासन को भारतीय मूल्यों के अनुरूप संवाद करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. साथ ही, ‘कर्तव्य पथ’ जैसे नाम बदलने के फैसले इसके साथ जुड़े हैं.
सेवा तीर्थ के पास प्रधानमंत्री के नए आधिकारिक आवास ‘एक्जीक्यूटिव एन्क्लेव पार्ट-2’ का निर्माण भी जारी है, जो प्रधानमंत्री मोदी के प्रशासनिक सुधारों और नई काम करने के तरीके का रिफ्लेक्शन है. यह बदलाव भारत की आधुनिक कार्यप्रणाली और शासन के नए युग की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है.
मंजीत नेगी