पीएम मोदी ने श्रीमद्भगवद्गीता की पांडुलिपि के 11 खंडों का किया विमोचन, 21 विद्वानों ने की है व्याख्या

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब देश आजादी के 75 साल मनाने जा रहा है तो हम सभी को गीता के इस पक्ष को देश के सामने रखने का प्रयास करना चाहिए. कैसे गीता ने आज़ादी की लड़ाई को ऊर्जा दी.

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प्रधानमंत्री ने किया विमोचन (ANI) प्रधानमंत्री ने किया विमोचन (ANI)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 8:36 PM IST
  • ये भारत की वैचारिक स्वतंत्रता का प्रतीक है: PM
  • PM ने कहा- गीता ने आज़ादी की लड़ाई को ऊर्जा दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों पर 21 विद्वानों की व्याख्या वाली पांडुलिपि के 11 खंडों का विमोचन किया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि मैं इस पुनीत कार्य के लिए प्रयास करने वाले सभी विद्वानों, इससे जुड़े हर व्यक्ति और उनके हर प्रयास को आदरपूर्वक नमन करता हूं.

पीएम ने कहा कि किसी एक ग्रंथ के हर श्लोक पर ये अलग-अलग व्याख्याएं, इतने मनीषियों की अभिव्यक्ति, ये गीता की उस गहराई का प्रतीक है, जिस पर हजारों विद्वानों ने अपना पूरा जीवन दिया है. ये भारत की उस वैचारिक स्वतंत्रता का भी प्रतीक है, जो हर व्यक्ति को अपने विचार रखने के लिए प्रेरित करती है.

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पीएम ने कहा कि गीता के विश्वरूप ने महाभारत से लेकर आजादी की लड़ाई तक हर कालखंड में हमारे राष्ट्र का पद प्रदर्शन किया है. भारत को एकता के सूत्र में बांधने वाले आदि शंकराचार्य ने गीता को आध्यात्मिक चेतना के रूप में देखा. गीता को रामानुजाचार्य ने आध्यात्मिक ज्ञान की अभिव्यक्ति के रूप में देखा.

ये गीता ही है जिसने दुनिया को निश्वार्थ सेवा जैसे भारत के आदर्शों से परिचित कराया. नहीं तो भारत की निश्वार्थ सेवा, विश्व बंधुत्व की हमारी भावना बहुतों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं होती.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब देश आजादी के 75 साल मनाने जा रहा है तो हम सभी को गीता के इस पक्ष को देश के सामने रखने का प्रयास करना चाहिए. कैसे गीता ने आज़ादी की लड़ाई को ऊर्जा दी. कैसे गीता ने देश को एकता के आध्यात्मिक सूत्र में बांधकर रखा. इन सब पर हम शोध करें, अपनी युवा पीढ़ी को इससे परिचित कराएं.

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