प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह एक्स पर एक पोस्ट को जरिए बीटिंग रिट्रीट समारोह की बात की. उन्होंने पोस्ट में इस समारोह की खास जानकारी देते हुए एक श्लोक भी दर्ज किया है. जिसके जरिये उन्होंने भारत के सैन्य संगठन और सशस्त्र बलों पर गर्व जताते हुए उनका सम्मान किया है. उन्होंने लिखा कि देश की रक्षा में समर्पित सशस्त्र बलों पर हमें गर्व है.
पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा, 'आज शाम बीटिंग रिट्रीट का आयोजन होगा. यह गणतंत्र दिवस समारोहों के समापन का प्रतीक है. इसमें भारत की समृद्ध सैन्य विरासत की शक्ति दिखाई देगी. देश की रक्षा में समर्पित अपने सशस्त्र बलों पर हमें अत्यंत गर्व है.'
उन्होंने इसके साथ ही एक श्लोक भी लिखा...
'एको बहूनामसि मन्य ईडिता विशं विशं युद्धाय सं शिशाधि।
अकृत्तरुक्त्वया युजा वयं द्युमन्तं घोषं विजयाय कृण्मसि॥'
बता दें कि बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ 78वें गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक और भव्य समापन होगा. इस अवसर पर राजधानी के विजय चौक पर भारतीय धुनों और देशभक्ति से ओत-प्रोत संगीत की गूंज सुनाई देगी. यह सेरेमनी 29 जनवरी यानी आज विजय चौक में आयोजित होगी. यह समारोह परंपरागत रूप से बहुत ही भव्य और अनुशासित तरीके से संपन्न होता है.
इस खास मौके पर भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंड अपनी मनमोहक और देशभक्ति से भरपूर प्रस्तुतियां देते हैं. इस तरह इस खूबसूरत आयोजन के साथ भारत के राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक समापन होता है.
अथर्ववेद की सूक्ति से जवानों में भरा जोश
पीएम मोदी ने इसी समारोह की बात अपनी पोस्ट में की है, लेकिन इसके साथ उन्होंने जो श्लोक लिखा है, वह अपने आप में सशस्त्र बलों सहित राष्ट्र के नाम एक संदेश बन जाता है. असल में यह श्लोक अथर्ववेद से लिया गया है. सनातन परंपरा में के सबसे पहले रिटेन डॉक्यूमेंट चार वेद हैं, जिनमे चौथा और आखिरी वेद अथर्ववेद है.
जहां ऋग्वेद वैदिक ऋचाओं, यजुर्वेद यज्ञ परंपरा और सामवेद संगीत शास्त्र से जुड़ा वेद है, वहीं अथर्ववेद व्यवहारिकता, जीवन शैली, औषधि, चमत्कार और अलग-अलग विधाओं के ज्ञान का भंडार है. इसी अथर्ववेद में राष्ट्र, सीमा, साम्राज्य आदि जुड़े नियम और व्यवहार भी दर्ज हैं.
संकल्प शक्ति की ओर इशारा करता है श्लोक
वैदिक परंपरा में अथर्ववेद जीवन के असली अर्थ से जुड़ा हुआ वेद माना गाया है. यह केवल देवताओं की स्तुति नहीं है, बल्कि मनुष्य के मन, उसके डर, क्रोध, साहस और संघर्ष-शक्ति को समझने का जरिया भी है. अथर्ववेद के सर्ग 4, सूक्त 31 को 'मन्यु सूक्त' कहा जाता है, इसी के चौथे श्लोक का जिक्र पीएम मोदी ने किया है. यह श्लोक संकल्प और नैतिक साहस की ओर इशारा करता है. जो सैनिकों के लिए सबसे अधिक जरूरी है.
इसका भाव सरल शब्दों में ऐसा है कि क्रोध यहां बुराई नहीं, बल्कि साहस और शक्ति जगाने वाला भाव बन जाता है. इसके मुताबिक क्रोध ही अकेला वह भाव है जो वीरों को सम्मान दिलाने वाला होता है, क्योंकि वही उन्हें लड़ने की हिम्मत देता है. इसलिए क्रोध हर समय गलत नहीं है. बल्कि उसका ठीक ढंग से इस्तेमाल जरूरी है. क्रोध मनुष्य को युद्ध या संघर्ष के लिए तैयार करता है और उन्हें कमजोर नहीं पड़ने देता.
ऐसे तेजस्वी क्रोध को अपना साथी बनाकर योद्धा और सिपाही जोश-उत्साह के साथ आगे बढ़ते हैं, सिंहनाद करते हैं और विजय के लिए प्रयास करते हैं. इसी क्रोध से प्रेरित होकर मनुष्य शत्रुओं पर धावा बोलता है और अंत में जीत, प्रशंसा और यश पाता है. इस अथर्ववैदिक मंत्र का सीधा अर्थ यह है कि, विजय के रास्तों पर साहस, सत्य और सामूहिक संकल्प से ही होकर पहुंचा जा सकता है. यही इस मंत्र का संदेश भी है.
विकास पोरवाल