प्लाज्मा थेरेपी ने बढ़ाई कोरोना मरीजों की तकलीफ, मौतें भी ज्‍यादा, नेचर पत्रिका की स्टडी

कोविड में प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) के असर पर लगातार संशय बना रहा है. इस बीच एक ताजा स्टडी ने फिर प्लाज्मा थेरेपी पर सवाल खड़े किए हैं.

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प्लाज्मा थेरेपी के असर को लेकर संशय लगातार बना रहा (फोटो-PTI) प्लाज्मा थेरेपी के असर को लेकर संशय लगातार बना रहा (फोटो-PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 5:00 PM IST
  • प्लाज्मा थेरेपी पर नई स्टडी सामने आई
  • प्लाज्मा थेरेपी की उपयोगिता पर फिर सवाल उठे

कोविड संक्रमित मरीज के लिए प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy For Covid) कितनी असरदार है? इसको लेकर वाद-विवाद अबतक हो रहा है. इस बीच एक ताजा स्टडी ने प्लाज्मा थेरेपी के प्रभाव को फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है. स्टडी का कहना है कि प्लाज्मा थेरपी से कोरोना संक्रमित मरीज को कोई मदद नहीं मिली बल्कि इसकी वजह से गंभीर प्रतिकूल घटनाएं या उसके जोखिम सामने आए.

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बता दें कि प्लाज्मा थेरेपी में संक्रमित मरीज को ऐसे शख्स का प्लाज्मा दिया जाता है जो कि कोरोना को हरा चुका हो. कोविड की दूसरी लहर के बीच ऑक्सीजन, बेड के साथ-साथ प्लाज्मा की मांग में भी तेजी आई थी. लेकिन अब कनाडा की इस स्टडी ने सबको चौंका दिया है. यह स्टडी नेचर पत्रिका (Nature Journal) ने की है.
 
'हॉस्पिटल में भर्ती कोविड संक्रमित के लिए प्लाज्मा थेरेपी' नाम से हुई स्टडी में 940 मरीजों को शामिल किया गया था, जिनका इलाज हॉस्पिटल में चल रहा था. प्लाज्मा थेरेपी लेने वाले कुल मरीजों में से 33.4 फीसदी मरीजों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जैसे ऑक्सीजन का लेवल गिरना, सांस लेने में दिक्कत. वहीं जिन लोगों को प्लाज्मा थेरेपी नहीं दी गई थी उनमें से 26.4 फीसदी को ही इस तरह की दिक्कत आई.

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30 दिन चली इस स्टडी के आखिर में पाया गया कि जिन्होंने प्लाज्मा थेरेपी ली थी उनकी मौत का आंकड़ा भी थोड़ा ज्यादा (23 फीसदी) था. वहीं जिस ग्रुप को प्लाज्मा थेरेपी नहीं दी गई थी उसमें मौत का नंबर 20.5 फीसदी था. स्टडी के मुताबिक, कोविड संक्रमण का पता लगने के 8 दिनों बाद लगभग सभी मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी गई थी. 

प्लाज्मा थेरेपी को नेशनल ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल से हटाया गया था

बता दें कि असर पर संशय होने के बाद प्लाज्मा थेरेपी को नेशनल ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल से हटा दिया गया था. बावजूद इसके दिल्ली में इसका इस्तेमाल हुआ था. दिल्ली सरकार ने इसके लिए प्लाज्मा बैंक भी बनाए थे. फिलहाल केस घटने के बाद वे इतने सक्रिय नहीं हैं.

देश के अलग-अलग हॉस्पिटल्स ने कोरोना की पहली लहर के वक्त प्लाज्मा थेरेपी दी थी. लेकिन असर पर सवाल उठने के बाद दूसरी लहर में कई हॉस्पिटल्स ने इसका प्रयोग नहीं किया. ICMR ने पिछले साल प्लाज्मा थेरेपी पर एक स्टडी की थी. इसमें पाया गया था कि प्लाज्मा थेरेपी की वजह से कोविड से मौतों में कमी नहीं आती. इस स्टडी को 39 शहरों में 400 कोविड मरीजों पर किया गया था.

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