मोची जूते के कारीगर, नाई कहलाएंगे सौंदर्य सेवा प्रदाता... संसदीय समिति ने दिए ये अहम सुझाव

संसद की उद्योग संबंधी स्थायी समिति ने सुझाव दिया है कि मोची, कुम्हार और नाई जैसे पेशों की पहचान जाति से नहीं बल्कि कौशल से होनी चाहिए. PM विश्वकर्मा योजना में पेशों के नाम बदलकर अधिक तटस्थ और पेशेवर बनाने की सिफारिश की गई है ताकि योजना अधिक समावेशी बन सके.

Advertisement
संसदीय समिति की सिफारिश में कहा गया है कि जाति नहीं, कौशल से पेश की पहचान होनी चाहिए. (Gemini Generated image) संसदीय समिति की सिफारिश में कहा गया है कि जाति नहीं, कौशल से पेश की पहचान होनी चाहिए. (Gemini Generated image)

पीयूष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 'पीएम विश्वकर्मा योजना' (PM Vishwakarma Scheme) को लेकर एक क्रांतिकारी बदलाव का सुझाव दिया है. समिति का कहना है कि मोची, जूता बनाने वाले और नाई जैसे पेशों को जाति से जोड़कर देखने की बजाय उन्हें उनके कौशल और पेशे के आधार पर पहचाना जाना चाहिए.

समिति ने यह भी कहा कि सरकार की पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पेशों के नामों में बदलाव कर उन्हें अधिक समावेशी और पेशेवर बनाया जाना चाहिए, ताकि योजना पूरे देश में समान रूप से स्वीकार्य हो सके.

Advertisement

संसदीय समिति के अनुसार वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में इस योजना के लिए आवंटन घटाकर लगभग 3,860.89 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि 2025-26 में यह करीब 25,100 करोड़ रुपये था. समिति का मानना है कि योजना की लोकप्रियता और पंजीकरण की अधिक संख्या को देखते हुए बजट में इतनी बड़ी कटौती चिंताजनक है और इसकी तत्काल समीक्षा की आवश्यकता है.

समिति की सिफारिश

समिति ने यह भी कहा कि योजना में कई ऐसे पेशों के नाम हैं जिन्हें कई क्षेत्रों में जाति से जोड़ा जाता है. इससे योजना की व्यापक स्वीकार्यता और समावेशिता प्रभावित हो सकती है. इसलिए इन पेशों के नामों को बदलकर अधिक तटस्थ और कार्य आधारित नाम दिए जाने चाहिए.

यह भी पढ़ें: 'जहां सस्ता मिलेगा, वहीं से तेल खरीदेगा भारत', संसदीय समिति को सरकार का जवाब!

Advertisement

समिति के मुताबिक,, जाति अथवा क्षेत्र-विशेष से जुड़े व्यवसाय नामों को तत्काल तर्कसंगत बनाया जाए और उनकी जगह पेशे-निरपेक्ष, कार्य-आधारित नाम अपनाए जाएं. जैसे-  मोची (Cobbler) के स्थान पर जूते का  कारीगर, कुम्हार (Potter) के स्थान पर सिरेमिक और मिट्टी के उत्पाद निर्माता, नाई (Barber) के स्थान पर व्यक्तिगत सौंदर्य सेवा प्रदाता.

समिति का कहना है कि इन बदलावों से योजना को जातिगत पहचान से दूर रखते हुए कौशल आधारित पहचान को बढ़ावा मिलेगा और यह पूरे देश में अधिक स्वीकार्य बन सकेगी.

संसदीय समिति ने सरकार से यह भी सिफारिश की है कि राज्यों और सामाजिक विशेषज्ञों से परामर्श कर योजना के तहत पेशों की एक नई और मानकीकृत सूची तैयार की जाए, जिसे पूरे देश में समान रूप से लागू किया जा सके.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बदलाव से पारंपरिक कारीगरों को सम्मानजनक पहचान मिल सकती है और उन्हें नए उद्यमियों के रूप में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement