गृह मंत्री अमित शाह ने देश में नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च की डेडलाइन तय की है. यह डेडलाइन करीब आ गई है. इस डेडलाइन के ठीक एक दिन पहले लोकसभा में इस दिशा में किए गए प्रयासों पर चर्चा हो रही है. लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर नियम 193 के तहत चर्चा की शुरुआत शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के सांसद डॉक्टर श्रीकांत शिंदे ने की है.
इससे पहले, लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकरप्सी बिल पर हुई चर्चा का लोकसभा में जवाब दिया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बैंकरप्सी बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस बिल ने बैंकों की सेहत सुधारने में बड़ा योगदान दिया है. यह बिल कुछ संशोधनों के साथ लोकसभा से पारित हो गया है.
अमित शाह लोकसभा में नक्सलवाद पर बोल रहे हैं. रेड कॉरिडोर में गिने जाने वाले 12 राज्य और आदिवासियों की ओर से आपका चर्चा के लिए धन्यवाद देता हूं. वे सालों से चाहते थे कि यह व्यवस्था एकबार संसद में उजागर हो और पूरी दुनिया उसको जाने. मगर लंबे समय तक उसको मौका नहीं दिया गया.
दमन दीव से निर्दलीय सांसद उमेशभाई बाबूभाई पटेल नक्सलवाद पर बोल रहे थे. पटेल ने बोलना शुरू ही किया था कि चेयर से कुमारी शैलजा ने बेल बजा दिया. इस पर निर्दलीय सांसद भड़क गए. उन्होंने कहा कि सबको तीन-तीन, चार-चार मिनट मिले हैं. मेरे साथ ऐसा क्यों. मैं छोटे प्रदेश से आता हूं, क्या मेरे साथ ऐसा इसलिए. मुझे मेरी बात कहने तो दीजिए. वह जब बोल रहे थे, उसी बीच चेयर से कुमारी शैलजा ने फिर से बेल बजाई और कहा कि खतम करिये. इस पर उन्होंने कहा कि खतम तो करने दीजिए. अभी वह बोल ही रहे थे कि चेयर से कुमारी शैलजा ने राजकुमार रौत का नाम ले लिया. राजकुमार रौत ने कहा नक्सलवाद पर चर्चा में नक्सल प्रभावित राज्यों के कितने सांसदों को बोलने का मौका दिया गया. सदन में भी यह हो रहा है.
आरजेडी सांसद प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने राज्यसभा में सीएपीएफ रेगुलेटरी बिल का विरोध किया. उन्होंने सीएपीएफ के अधिकारियों, जवानों का दर्द भी बयान किया और कहा कि हम आज श्रद्धांजलि के देश में तब्दील हो गए हैं.
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असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सीपीआई (एमएल) ने 1974 से 1977 तक तीन साल के लिए भी आंदोलन वापस लिया था. फिर से हथियार उठा लिया था. यह 90 परसेंट मिलिट्री एक्शन है. एक भी सदस्य ने यह नहीं कहा कि हम विचारधारा सरेंडर कर रहे हैं. हमने नेपाल, बांग्लादेश में देखा कि यूथ ने गवर्नमेंट नहीं, गवर्नेंस बदलने के लिए आंदोलन किया.
लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इस समस्या का समाधान मुलायम सिंह यादव के बताए रास्ते पर चलकर ही हो सकती है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों का शोषण होगा तो हम समाजवादी लोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.
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राजस्थान के सीकर से सीपीआई (एम) के सांसद अमरा राम ने कहा कि आदिवासियों की अनुमति के बिना जमीन नहीं लेने के नियम को नेस्तनाबूद कर देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वन अधिकार कानून बनने के बाद 90 फीसदी लोगों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए और पीढ़ी दर पीढ़ी रह रहे आदिवासी समुदाय के लोगों को खदेड़ने का काम किया जा रहा है. नासिक से आदिवासी मुंबई की ओर बढ़ने लगे, तब वहां की डबल इंजन सरकार को जमीन के पट्टे बहाल करने पड़े. इसी सरकार के नेतृत्व में जेएनयू के छात्रसंघ के चारो पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया, क्योंकि वे अपने अधिकार की बात कर रहे थे. इस सरकार ने चुनाव को निरस्त कर दिया. छात्रावासों में गैस नहीं मिल रही है, उस पर चर्चा कराने के लिए सरकार के पास समय नहीं है.
राज्यसभा में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स रेगुलेटरी बिल पर चर्चा चल रही है. उच्च सदन में भोजनावकाश के बाद दो बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, सदन में सीएपीएफ बिल चर्चा के लिए लिया गया. इस बिल पर सदन में चर्चा जारी है.सीएपीएफ बिल पर राज्यसभा में बीजेपी के सांसद डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी बोल रहे हैं.
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि नक्सलवाद को पैदा करने वाले लोग हैं. ये वही लोग है, जो दबे-कुचले, शोषित-वंचित लोगों का शोषण करते हैं. उन्होंने कहा कि नक्सलियों में भी जागरूकता आई कि मार-काट से कुछ हासिल नहीं होगी. गया के कई प्रखंड नक्सल से अति प्रभावित क्षेत्र हैं. आज भी यह इलाका सुखाड़ से प्रभावित है. सरकार ने खनन रोक दिया. इससे आम लोग प्रभावित हुए हैं. इस क्षेत्र से जुड़े लोग मुख्यधारा से जुड़ने का हर संभव प्रयास करते हैं. विकास का मॉडल क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से नहीं बनाया जा रहा. जनप्रतिनिधियों से कोई फीडबैक नहीं लिया जाता. इमामगंज का उदाहरण देते हुए अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि एक गांव है हीरनपथरा. इस गांव के लोग आज भी आजादी पाने के लिए तरस रहे हैं. ऐसे अनेकों गांव हैं. यहां न पुल-पुलिया है, ना ही रोड. छकरबंधा नक्सल राजधानी कहा जाता था, यहां तक कच्ची रोड है, वह रोड भी नहीं बनी. सरकार से हमारी मांग है कि स्थानीय सामाजिक संगठन, बुद्धिजीवि, पंचायत-प्रखंड, जनप्रतिनिधि-प्रशासन-पुलिस का फीडबैक सिस्टम बने.
विपक्षी दलों ने लोकसभा में एलपीजी संकट पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया. विपक्षी दलों ने कहा कि पूरा देश एलपीजी संकट से जूझ रहा है और आप नियम 193 के तहत नक्सलवाद पर चर्चा लेकर आ गए. विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी.
महुआ मोइत्रा ने नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान कहा कि आज देश राइटविंग आतंकवाद से त्रस्त है. एनर्जी क्राइसिस से निपटने के लिए किसी रोडमैप की कोई बात नहीं हो रही है. आज आपने अचानक नक्सलवाद पर चर्चा शुरू करा दी. कितने महान हैं अमित शाह जी, सबको ठोक कर ठंडा कर दिया. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद 1969 में सिलीगुड़ी के पास नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ और बाकी जगह फैला. लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिज्म कानून-व्यवस्था की परेशानी नहीं थी.आज बीजेपी दावा कर रही है कि हमने इस समस्या का समाधान कर दिया. मनरेगा, फॉरेस्ट राइट्स एक्ट जैसे कदमों का इसमें बड़ा योगदान रहा. 2019 से 2025 के बीच किलिंग बढ़ी, गिरफ्तारियां कम हुईं. सिक्योरिटी रिलेटेड फंड्स 44 परसेंट खर्च नहीं हुए इस वित्तीय वर्ष में. एक लाख से अधिक वैकेंसी हैं सीएपीएफ में. सीआरपीएफ में 122 सुसाइड हुए, 2020 से 2025 तक इस्तीफों में तीन गुना इजाफा हुआ है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों में 12 हजार किलोमीटर रोड मंजूर हुई है. 2700 किलोमीटर रोड फंड की कमी के कारण अभी पेंडिंग हैं. महुआ मोइत्रा ने 2011 से 2017 के बीच नक्सलियों के सरेंडर के आंकड़े बताए और कहा कि हमने मिलिट्री पावर यूज नहीं की. हमने वेलफेयर पर जोर देकर पश्चिम बंगाल को नक्सल मुक्त बनाया.
लोकसभा में नक्सलवाद के खात्मे के लिए किए गए प्रयासों पर चर्चा ल रही है. इस चर्चा का गृह मंत्री अमित शाह शाम पांच जवाब दे सकते हैं. नियम 193 के तहत चल रही इस चर्चा के बाद वोटिंग का नियम नहीं है. गृह मंत्री अमित शाह इस चर्चा पर बोल सकते हैं.
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव को स्पीकर ओम बिरला ने टोका, तब उन्होंने कहा कि ठीक है, हम छोड़ दे रहे हैं. स्पीकर ने उनसे सवाल पूछने को कहा. धर्मेंद्र यादव के सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष को निशाने पर लिया.
लोकसभा में लिस्टेड बिजनेस लिए जाते समय स्पीकर ने चेयर से रक्षा खडसे का नाम गलत ले लिया. रक्षा खडसे ने इसे करेक्ट किया और फिर अपने नाम के आगे लिस्टेड बिजनेस सदन पटल पर रखा.
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लोकसभा में नक्सलवाद समाप्त करने की दिशा में किए गए प्रयासों पर लोकसभा में नियम 193 के तहत चर्चा की शुरुआत हो गई है. शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के सांसद डॉक्टर एकनाथ शिंदे ने इस चर्चा की शुरुआत करते ह8ुए कहा कि जो लोग कहते थे कि इसे खतम नहीं किया जा सकता, उनको यह करारा जवाब है. गृह मंत्री ने एक डेडलाइन तय की और उस डेडलाइन से पहले इसको खतम करने का प्रयास भी किया. यह कहा करते थे कि इसे समाप्त नहीं किया जा सकता. अगर विपक्ष ने समय पर इंटरवेंशन किया होता, तो नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन वहीं का वहीं रोका जा सकता था.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में बैंकरप्सी बिल पर चर्चा का जवाब दे रही हैं. वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि इस बिल पर 46 सदस्यों ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि आईबीसी 2016 ने बहुत योगदान दिया. यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर की हेल्थ सुधारने के लिए है. बैंकिंग सेक्टर में इसने बड़ा रोल निभाया है. 1 लाख 4 हजार और 99 करोड़ रुपये बैंकों ने वसूले हैं. यह आईबीसी के कारण ही संभव हो सका.
लोकसभा में एलपीजी संकट को लेकर चर्चा की मांग पर विपक्ष ने सोमवार को जोरदार हंगामा किया. विपक्ष के हंगामे के कारण स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही 12.30 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. सदन की कार्यवाही अब 12.30 बजे दोबारा शुरू होगी.
लोकसभा में विपक्ष के सदस्यों ने एलपीजी क्राइसिस पर चर्चा की मांग की है. विपक्ष के सदस्यों ने कहा कि नक्सलवाद पर चर्चा हो, हम इससे भाग नहीं रहे. हम चर्चा के लिए तैयार हैं. लेकिन देश में इस समय एलपीजी का संकट है. इस मुद्दे पर चर्चा की मांग बीएसी में भी उठी थी. सरकार ने भी इसके लिए सहमति दी थी. अब सरकार चर्चा से भाग रही है. पता नहीं क्यों सरकार चर्चा से भाग रही है. स्पीकर ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को समझा करें. इस पर् मंत्री ने डिटेल स्टेटमेंट दिया था. सर्वदलीय बैठक भी हो चुकी है.
लोकसभा में आज गृह मंत्री अमित शाह की ओर से तय नक्सल मुक्त भारत के लिए तय डेडलाइन 31 मार्च 2026 से एक दिन पहले यानी आज 30 मार्च को लोकसभा में नक्सलवाद के ख़ात्मे पर चर्चा होगी. यह चर्चा नियम 193 के तहत होगी. श्रीकांत शिंदे इस चर्चा की शुरुआत करेंगे. गौरतलब है कि नियम 193 के अंतर्गत चर्चा के लिए सदन के समक्ष कोई औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करना जरूरी नहीं है. इस नियम के तहत आने वाले मामलों पर चर्चा के बाद मतदान नहीं हो सकता है. सूचना देने वाला सदस्य संक्षिप्त वक्तव्य दे सकता है और अध्यक्ष को पूर्व सूचना दे चुके सदस्यों को चर्चा में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है.