गिरफ्तार हुए पीएम, CM और मंत्रियों को हटाने वाला बिल बनाने के पीछे क्या वजह? जानिए विधेयक की अहम बातें

सरकार ने जेल में बंद नेताओं को पद पर बने रहने से रोकने के लिए एक विधेयक पेश किया है. यह कदम हाल के दिनों में ऐसे कई मामलों के सामने आने के बाद उठाया गया है, जब नेता जेल में रहने के बावजूद पद पर बने रहे.

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ऐसे आया सीएम, पीएम को हटाने वाले बिल का आइडिया (File Photo: PTI) ऐसे आया सीएम, पीएम को हटाने वाले बिल का आइडिया (File Photo: PTI)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 5:57 PM IST

केंद्र सरकार ने एक ऐसा बिल पेश किया है, जिसके तहत जेल में बंद कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अपने पद पर नहीं रह पाएगा. इस बिल को लाने के पीछे गृह मंत्री ने तर्क दिया, "आप जेल की कोठरी से भारत पर शासन नहीं कर सकते." यह फैसला पूरे देश में हाल ही में सामने आए ऐसे मामलों को देखते हुए लिया गया है.

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इस बिल को लाने के पीछे कोई हालिया घटना नहीं, बल्कि कई साल से चल रही चर्चाएं और जमीनी फीडबैक है. हाल ही में, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जेल में होने के बावजूद इस्तीफा न देने का मामला सामने आया था. 

इसी तरह, दिल्ली के मंत्री सत्येन्द्र जैन और तमिलनाडु के सेंथिल बालाजी भी जेल में रहते हुए मंत्री पद पर बने रहे थे. इन घटनाओं की वजह से इस बिल की नींव रखी गई.

संसद में अमित शाह का रुख...

लोकसभा में बिल पेश करते समय गृह मंत्री अमित शाह शांत और आक्रामक दोनों रूप में नजर आए. उन्होंने कहा, "इंदिरा गांधी ने खुद को बचाने के लिए संविधान में संशोधन किया था. कांग्रेस उसी कल्चर को जारी रखे हुए है." 

विधेयक के मुख्य प्रावधान क्या हैं?

अमित शाह ने संसद में बताया कि विधेयक यह तय करेगा कि अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में हैं, तो वे अपने पद पर नहीं रह सकते. बिल के प्रमुख प्रावधानों में शामिल है कि अगर किसी नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे पद छोड़ना होगा. अगर 30 दिन के अंदर जमानत नहीं मिलती है, तो वह स्वतः ही अयोग्य हो जाएगा. जमानत मिलने के बाद ही वह कानूनी रूप से वापस पद पर आ सकता है.

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यह भी पढ़ें: PM-CM को हटाने वाले बिल पर संसद में बवाल, विपक्ष का विरोध जारी, देखें

सदन में विपक्ष का विरोध...

अमित शाह के बिल पेश करने के बाद विपक्षी सांसदों ने भारी हंगामा किया. तृणमूल कांग्रेस के सांसद उनके करीब आकर खड़े हो गए और बिल फाड़कर कागज का टुकड़ा उनके ऊपर फेका गया. कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और धर्मेंद्र यादव ने बिल की प्रतियां फाड़ दीं. इस हंगामे के बावजूद, अमित शाह ने कहा, "उन्हें चिल्लाने दो. मैं उन्हें संभाल लूंगा."

अमित शाह ने कहा, "साल 1946 में जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. बी.आर. अंबेडकर संविधान सभा का नेतृत्व कर रहे थे, तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि देश पर जेल से शासन किया जाएगा." उन्होंने आगे कहा कि यह संशोधन राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक है.

अमित शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि आरोप लगने के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन कांग्रेस अभी भी भ्रष्टाचारियों को बचा रही है.

 
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