वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में अपना रिकॉर्ड नौवां लगातार केंद्रीय बजट पशे किया. यह। भाषण क़रीब 85 मिनट का रहा. इस बजट में उन्होंने ख़ास तौर से निवेश, आर्थिक विकास और सुधारों पर जोर दिया और काव्यात्मक उद्धरणों से दूरी बनाए रखी.
इस मौके पर ने बैंगनी रंग की कांचीवरम साड़ी पहन कर अपने गृह राज्य तमिलनाडु की पारंपरिक बुनाई को सम्मान दिया. भाषण की शुरुआत में गुरु रविदास और माघ पूर्णिमा का उल्लेख हुआ, लेकिन मुख्य तौर से बजट बिजनेस और नीतिगत पहलुओं पर केंद्रित रहा.
इस बार के भाषण में न तो किसी कवि का जिक्र था, न ही तिरुवल्लुवर या बसवन्ना जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों का उल्लेख हुआ, जिससे साफ हुआ कि फोकस पूरी तरह आर्थिक विकास और निवेश पर था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को इतिहास में मील का पत्थर और देश के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला बताया. सत्ता पक्ष के सांसद बार-बार मेज थपथपाकर समर्थन कर रहे थे, जबकि विपक्ष खासा असंतुष्ट नजर आया. केरल से जुड़े कांग्रेस सांसदों का कहना है कि बजट से जैसा उन्हें उम्मीद था वो नहीं मिला.
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इस बार का बजट पहली बार कर्तव्य भवन स्थित वित्त मंत्रालय के कार्यालय से तैयार किया गया. लोकसभा परिसर में सांसदों के बीच विभिन्न चर्चाएं और हलचल भी देखने को मिली. विपक्षी बेंचों पर एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले को उनके चचेरे भाई और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन पर सांत्वना देते हुए देखा गया.
बजट पेश करने दौरान सत्ता पक्ष ने “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारे लगाए, वहीं विपक्ष ने “जय संविधान” के नारों से इसका जवाब दिया. बजट के बाद प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई दी. इस बजट ने निवेश व विकास की दिशा में एक सशक्त संदेश दिया.
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