संसदीय समिति ने नए डीएनए बिल के तहत प्रस्तावित क्राइम सीन डीएनए प्रोफाइल का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने पर चिंता जताई है. समिति का कहना है कि इससे हर किसी का डीएनए मौजूद होगा, जो क्राइम सीन पर पहले या बाद में गए होंगे या फिर उनके बाल या किसी भी सैंपल को क्राइम सीन तक पहुंचाया गया होगा.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश की अध्यक्षता में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी संसदीय स्थायी समिति से संबंधित 32 सदस्यीय विभाग ने बुधवार को राज्यसभा के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की. समिति के दो सदस्यों असदुद्दीन ओवैसी और बिनॉय विश्वम ने एक असहमतिपूर्ण नोट प्रस्तुत किया है.
संसदीय समिति का कहना है, 'डीएनए प्रोफाइल के राष्ट्रीय डेटा बैंक के साथ जोखिम यह है कि इसमें संभवतः सभी को शामिल किया जाएगा, जो क्राइम सीन पर पहले या बाद में गए होंगे, अगर वह क्राइम से जुड़े भी नहीं होंगे तो भी वह जांच का हिस्सा बन जाएंगे. इसके बाद बिना इन लोगों की जानकारी के इनका डीएनए "क्राइम सीन इंडेक्स" का हिस्सा बन जाएगा.'
संसदीय समिति ने सुझाव दिया कि अपराध स्थल डीएनए प्रोफाइल का उपयोग जांच और परीक्षण में किया जा सकता है, लेकिन इसे डेटा बैंक में नहीं डाला जाना चाहिए, और मामला समाप्त होने के बाद इसे नष्ट कर दिया जाना चाहिए. अगर कोई दोषी है, तो दोषी के डीएनए प्रोफाइल को ही डेटा बैंक में शामिल किया जा सकता है.
क्या है डीएनए बिल
तत्कालीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्ष वर्धन ने 8 जुलाई, 2019 को लोकसभा में डीएनए बिल पेश किया था. इस बिल में कुछ लोगों की पहचान स्थापित करने हेतु डीएनए टेक्नोलॉजी के प्रयोग के रेगुलेशन का प्रावधान है. इससे पहले ऐसा ही एक बिल अगस्त, 2018 को लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन वह लैप्स हो गया था.
कैसे होगा डीएनए कलेक्शन
नए डीएनए बिल के मुताबिक, डीएनए प्रोफाइल तैयार करते समय जांच अधिकारियों द्वारा किसी व्यक्ति के शारीरिक पदार्थों को इकट्ठा किया जा सकता है. कुछ स्थितियों में इन पदार्थों को इकट्ठा करने के लिए अधिकारियों को उस व्यक्ति की सहमति लेनी होगी. सात साल से नीचे के सजायाफ्ता कैदी से भी सहमति लेनी होगी, लेकिन उससे ऊपर वाले की सहमति नहीं चाहिए.
कैसे बनाया जाएगा डीएनए डेटा बैंक
राष्ट्रीय डीएनए डेटा बैंक और हर राज्य में क्षेत्रीय डीएनए डेटा बैंक खोला जाएगा. हर डेटा बैंक में क्राइम सीन इंडेक्स, संदिग्ध व्यक्तियों (सस्पेक्ट) या विचाराधीन कैदियों (अंडरट्रायल्स) के इंडेक्स, अपराधियों के इंडेक्स, लापता व्यक्तियों के इंडेक्स और अज्ञात मृत व्यक्तियों के इंडेक्स होंगे.
बनेगा रेगुलेटरी बोर्ड
डीएनए बिल में डीएनए रेगुलेटरी बोर्ड की स्थापना का प्रावधान है जोकि डीएनए डेटा बैंक और डीएनए लेबोरेट्रीज़ को सुपरवाइज करेगा. बायोटेक्नोलॉजी विभाग का सेक्रेटरी बोर्ड का एक्स ऑफिशियो चेयरपर्सन होगा. डीएनए प्रोफाइल की इंट्री, उसे रखने या हटाने के मानदंडों पर रेगुलेटरी बोर्ड फैसला लेगा.
बिना अनुमति डीएनए सैंपल इस्तेमाल पर सजा
डीएनए बिल के मुताबिक, डीएनए सूचना का खुलासा करना, अनुमति के बिना डीएनए सैंपल का इस्तेमाल करने पर सजा का प्रावधान है. डीएनए सूचना का खुलासा करने पर तीन साल तक की कैद की सजा भुगतनी पड़ सकती है और एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है.
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