NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने साल 2024 के लिए देश में अपराध की स्थिति का डेटा जारी किया है. देशभर में इस साल कुल 58.85 लाख अपराध दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में कम हैं. इनमें आईपीसी और नए कानूनों के तहत 35.44 लाख मामले और विशेष कानूनों के तहत 23.41 लाख केस शामिल हैं.
डेटा के मुताबिक, हत्या के मामलों में 2.4% की गिरावट आई है और अपहरण के केस भी 15.4% कम हुए हैं.
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 1.5% की मामूली कमी देखी गई है. यह रिपोर्ट दिखाती है कि पुलिस ने तमाम श्रेणियों में केस दर्ज कर अपराधियों पर लगाम कसने की कोशिश की है.
साइबर क्राइम में उछाल
देश में डिजिटल सिक्योरिटी अब सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरी है. साल 2024 में साइबर क्राइम के 1,01,928 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 17.9% ज्यादा हैं. साइबर क्राइम की दर अब प्रति लाख आबादी पर 6.2 से बढ़कर 7.3 हो गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि कुल साइबर मामलों में से 72.6% केवल ऑनलाइन फ्रॉड के हैं. इसके अलावा, ऑनलाइन यौन शोषण और जबरन वसूली के मामलों ने भी सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. आर्थिक अपराधों में भी 4.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
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रिपोर्ट का सबसे दुखद पहलू बच्चों और सीनियर नागरिकों की सिक्योरिटी से जुड़ा है. बच्चों के खिलाफ अपराधों में 5.9% की बढ़ोतरी हुई है और कुल 1.87 लाख केस दर्ज किए गए हैं.
वहीं, सीनियर सिटीजन के खिलाफ अपराधों में 16.9% की भारी बढ़ोतरी हुई है. मानव तस्करी में मामूली कमी के बावजूद 5.2 लाख लोगों का लापता होना एक बड़ी चिंता है, जिनमें बड़ी तादाद महिलाओं और बच्चों की है. कुल मिलाकर, पारंपरिक अपराध भले ही घटे हों, लेकिन समाज के संवेदनशील वर्गों पर खतरा और डिजिटल ठगी लगातार बढ़ रही है.
जितेंद्र बहादुर सिंह