कृषि कानून के खिलाफ बीजेपी में नाराजगी बरकरार, BJYM के पंजाब प्रदेश महामंत्री का भी इस्तीफा

कृषि कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पंजाब इकाई में भी असंतोष खुलकर सामने आ चुका है और बीजेपी में भी इस्तीफा हो चुका है. पंजाब बीजेपी के महासचिव और कोर कमेटी के सदस्य मलविंदर कंग के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के पंजाब प्रदेश महामंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया है.

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कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में प्रदर्शन जारी (पीटीआई) कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में प्रदर्शन जारी (पीटीआई)

सतेंदर चौहान

  • चंडीगढ़,
  • 31 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 8:06 PM IST
  • केंद्र के 3 कृषि कानूनों को लेकर प्रदर्शन जारी
  • अब बरिंदर ढिल्लों ने भी BJP से इस्तीफा दिया
  • पंजाब बीजेपी के महासचिव भी दे चुके हैं इस्तीफा

केंद्र सरकार के 3 कृषि कानूनों को लेकर न सिर्फ विपक्षी दलों में नाराजगी है बल्कि खुद भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी नाराजगी देखी जा रही है. भारतीय जनता युवा मोर्चा के पंजाब प्रदेश महामंत्री बरिंदर ढिल्लों ने आज शनिवार को केंद्र सरकार के तीन किसान बिलों के विरोध में बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है.

इससे पहले भी कृषि कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पंजाब इकाई में भी असंतोष खुलकर सामने आ चुका है और बीजेपी में भी इस्तीफा हो चुका है. पंजाब बीजेपी के महासचिव और कोर कमेटी के सदस्य मलविंदर कंग ने पिछले दिनों कानून के विरोध में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.

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मलविंदर कंग ने अपना इस्तीफा पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष अश्विनी शर्मा को भेजा. अश्विनी शर्मा को भेजे अपने इस्तीफे में कंग ने किसानों, आढ़तियों और छोटे व्यापारियों के लिए कृषि कानूनों को किसान और व्यापारी विरोधी बताया है. साथ ही उन्होंने किसानों, आढ़तियों और छोटे व्यापारियों की ओर से कृषि कानूनों को लेकर हो रहे रहे विरोध को जायज भी ठहराया.

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कंग ने इस्तीफा देते हुए कहा है कि उन्होंने कृषि कानूनों के मुद्दे को न केवल पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में उठाया, बल्कि राज्य और केंद्रीय नेताओं को भी किसानों की नाराजगी के बारे में आगाह किया था. पंजाब बीजेपी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा है कि अभी उनको मलविंदर कंग का इस्तीफा नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि पार्टी में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है.

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इस बीच पंजाब ही नहीं देश के कई हिस्सों से नए कृषि कानूनों का विरोध किया जा रहा है. पंजाब में भी किसान लगातार मुखर हैं और मोदी सरकार के कृषि से जुड़े कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. वहां पर कई दिनों से प्रदर्शन जारी है.

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को देखते हुए पंजाब की तरफ जाने वाली तमाम ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है. केंद्र के इस फैसले के खिलाफ सत्ताधारी कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल, किसान यूनियन भी केंद्र सरकार के खिलाफ आ गए हैं.

प्रदर्शनकारी किसान संगठनों का आरोप है कि केंद्र की बीजेपी सरकार पंजाब के किसान संगठनों और पंजाब सरकार के साथ बदले की कार्रवाई के तहत मालगाड़ियों को आने नहीं दे रही जिससे पंजाब के लोग परेशान हों. केंद्रीय कृषि अधिनियमों के खिलाफ किसान संगठनों और किसानों के समर्थन में आने वाली पंजाब सरकार से बदला लेने की ये केंद्र की कोशिश है.

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