भारत-नेपाल बॉर्डर पर नए कस्टम नियमों से बवाल, MEA ने दी प्रतिक्रिया, कहा- व्यक्तिगत सामान नहीं रोका जाएगा

भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल सरकार द्वारा लागू किए गए नए सीमा शुल्क नियमों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है. 100 रुपये से अधिक के सामान पर टैक्स लगाने के इस फैसले के विरोध में मधेशी युवाओं ने काठमांडू की सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की और इसे गरीबों पर हमला बताया.

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नेपाल के नए कस्टम नियम पर MEA की प्रतिक्रिया.  (File Photo: PTI) नेपाल के नए कस्टम नियम पर MEA की प्रतिक्रिया. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:26 AM IST

विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली अधिकारियों द्वारा लागू किए गए नए सीमा शुल्क नियमों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हमें नेपाली अधिकारियों द्वारा एक मौजूदा नियम को लागू करने की खबरों के बारे में जानकारी है.

नेपाल से जुड़े सवाल पर बोलते हुए एमईए प्रवक्ता ने कहा कि "हमें नेपाली अधिकारियों द्वारा एक मौजूदा नियम को लागू करने की खबरों की जानकारी है, जिसके तहत सीमा पार करने वाले यात्रियों से सीमा शुल्क वसूला जाता है यदि वह भारत में खरीदे गए 100 एनपीआर से अधिक मूल्य के सामान ले जा रहे हों."

उन्होंने ये भी कहा कि हमें पता चला है कि नेपाल सरकार ने ये कदम मुख्य रूप से अनौपचारिक व्यापार और तस्करी पर अंकुश लगाने के इरादे से उठाया है. हमने एक वरिष्ठ नेपाली अधिकारी का बयान भी देखा है, जिसमें कहा गया है कि व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए घरेलू सामान ले जा रहे आम लोगों को नहीं रोका जाएगा.

क्या है मामला

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दरअसल, नेपाल की नई सरकार ने वैशाख 1, 2083 (नेपाली नववर्ष) के अवसर पर भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये (NPR) से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी वसूलने का नियम कड़ा कर दिया है. इस नए नियम ने भारत की सीमा से लगे तराई इलाके में दैनिक जीवन को काफी प्रभावित किया है.

नेपाली सरकार का तर्क है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य अनौपचारिक व्यापार और तस्करी को रोकना है. हालांकि, इस फैसले से उन स्थानीय लोगों में गुस्सा है जो दैनिक जरूरतों के लिए सीमा पार के बाजारों पर निर्भर हैं. काठमांडू के माइतीघर मंडला में शनिवार को मधेशी युवाओं ने प्रदर्शन किया, जिसमें 'कस्टम ड्यूटी रद्द करो' और 'मधेशी लोगों का सम्मान करो' जैसे नारे लगाए गए.

वहीं, सीमावर्ती क्षेत्रों के कई सांसदों ने भी इन पाबंदियों में ढील देने की मांग उठाई है.

नेपाल के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) फेडरेशन के अध्यक्ष कौशल कुमार सिंह ने पीटीआई को बताया, 'सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों द्वारा सीमा पार से लाई जा रही छोटी वस्तुओं पर कर लगाने से न केवल सीमा पार लोगों की आवाजाही बाधित हुई है, बल्कि दक्षिणी पड़ोसी के साथ हमारे सदियों पुराने संबंधों को भी नुकसान पहुंचा है.'

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