मणिपुर में बिष्णुपुर जिले के थिनुंगेई इलाके में मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे तनाव फैल गया जब प्रदर्शनकारियों ने सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मियों को ले जा रही तीन गाड़ियों को रोक लिया. हाल ही में ट्रोंगलाओबी बम धमाके में दो बच्चों की मौत से गुस्साए स्थानीय लोगों ने बोलेरो, वर्ना और स्विफ्ट गाड़ियों की चेकिंग की. गाड़ियों में सवार लोगों ने खुद को असम राइफल्स का कर्मी बताया लेकिन पहचान पत्र न दिखा पाने पर प्रदर्शनकारियों का शक गहरा गया.
भीड़ ने पांच लोगों को बंधक बना लिया, जबकि अन्य भाग निकले. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने दो गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया.
इस पूरी घटना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पांच महिलाओं सहित करीब 18 लोग मामूली रूप से घायल हो गए हैं. सुरक्षा बलों ने बाद में बंधक बनाए गए व्यक्तियों को अपनी हिरासत में ले लिया.
नारकोटिक्स ऑपरेशन बनाम उग्रवादी शक
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि हथियारों से लैस ये शख्स संदिग्ध कुकी उग्रवादी हो सकते हैं. हालांकि, एक सुरक्षा अधिकारी ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ये कर्मी एक नशीली दवाओं के मामले से जुड़े ऑपरेशन का हिस्सा थे. दरअसल, इम्फाल एयरपोर्ट पर 7 किलो मॉर्फिन के साथ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा बल सादे कपड़ों में क्वाकटा की ओर जा रहे थे.
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प्रदर्शनकारियों ने टिड्डिम रोड को ब्लॉक कर दिया और निंगथौखोंग व नामबोल जैसे स्थानों पर सुरक्षा बलों से भिड़ गए. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए मणिपुर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने आंसू गैस के गोले, धुआं बम और कुछ जगहों पर गोलियों का इस्तेमाल किया. जिला अस्पताल के पास आंसू गैस छोड़े जाने से कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत और चोटें आईं.
ताजा हिंसा के बाद बिष्णुपुर जिले में स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है. घाटी के पांच अन्य जिलों में सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई है, लेकिन मौजूदा हालातों के मद्देनजर बिष्णुपुर जिले में कर्फ्यू में कोई ढील नहीं दी गई है. सुरक्षा बल पूरे इलाके में कड़ी निगरानी रख रहे हैं, जिससे हिंसा को दोबारा भड़कने से रोका जा सके.
बेबी शिरीन