महाराष्ट्र: 7/11 की बरसी से ठीक पहले, बॉम्बे HC में 9 साल बाद याचिकाओं पर सुनवाई की उम्मीद

मामले में दोषी पाए गए एहतेशाम सिद्दीकी ने 2022 में जल्द सुनवाई के लिए भी इसी तरह की अर्जी दी थी और फिर एक रिमाइंडर भी दिया था. एक बेंच ने अपीलों पर सुनवाई शुरू की, लेकिन एक जस्टिस का नागपुर बेंच में तबादला हो जाने की वजह से याचिकाओं सुनवाई के लिए को दूसरी बेंच के पास भेजना पड़ा.

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बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल फोटो) बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

विद्या

  • मुंबई,
  • 02 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 10:35 AM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने मुंबई 7/11 ट्रेन विस्फोट के दोषियों को आश्वासन दिया है कि वह जल्द ही तय करेगा कि वह उनकी अपीलों पर सुनवाई कब शुरू करेगा, जिसकी सुनवाई अगर रोजाना की जाए तो इसमें छह महीने लग सकते हैं. पिछले 9 सालों से मौत की सजा का सामना कर रहे मुंबई ट्रेन विस्फोट के एक दोषी ने 7/11 ट्रेन विस्फोट की अपीलों पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जो पिछले कई सालों से लंबित है.

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दोषी एहतेशाम सिद्दीकी ने अपने वकील युग मोहित चौधरी के जरिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिन्होंने कहा कि यह एक 'गंभीर मामला' है, जहां लोग पिछले 18 सालों से बिना अपील की सुनवाई के सलाखों के पीछे हैं.

दोषियों की क्यों नहीं हुई सुनवाई?

एडवोकेट युग मोहित चौधरी ने कहा, "कुछ तारीखें अहम हैं. उन्हें 2006 में गिरफ्तार किया गया था, 2015 में दोषी ठहराया गया और यह इस अदालत के समक्ष लंबित मौत की सजा की पुष्टि की सबसे पुरानी याचिका है. चूंकि ये अपील और पुष्टि के लिए याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर की गई थीं, इसलिए पुष्टि के लिए अन्य दोषियों की 14 अन्य याचिकाओं पर सुनवाई हो चुकी है, लेकिन ट्रेन विस्फोट के दोषियों की सुनवाई नहीं हो रही है."

चौधरी ने आगे बताया कि मामले में दलीलें पूरी हो चुकी हैं, लेकिन भारी मात्रा में दस्तावेजों के कारण, 192 अभियोजन पक्ष के गवाह, 51 बचाव पक्ष के गवाह, 190 कागजात की बड़ी मात्रा होने के कारण, इतने सालों में किसी भी बेंच ने अपील पर सुनवाई नहीं की है.

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जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने कहा, "हमें भारी मात्रा में दस्तावेजों से विचलित नहीं होना चाहिए, लेकिन हमें यह जानने की जरूरत है कि इसमें (सुनवाई पूरी होने में) कितना वक्त लगेगा. हम समझते हैं कि 18 साल का वक्त काफी लंबा होता है."

पीठ ने चौधरी और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राजा चौधरी को निर्देश दिया कि वे साथ बैठकर तय करें कि सुनवाई पूरी करने में उन्हें कितना वक्त लगेगा. चौधरी ने कहा कि यह पहले ही हो चुका है और अगर बेंच हर दोपहर सिर्फ ट्रेन विस्फोट की अपीलों पर सुनवाई करने के लिए बैठती है, तो सुनवाई पूरी करने में छह महीने लग जाएंगे.

बेंच ने कहा कि वह इस बारे में इसी हफ्ते फैसला करेगी.

दोषी एहतेशाम सिद्दीकी ने 2022 में जल्द सुनवाई के लिए भी इसी तरह की अर्जी दी थी और फिर एक रिमाइंडर भी दिया था. एक बेंच ने अपीलों पर सुनवाई शुरू की, लेकिन एक जस्टिस का नागपुर बेंच में तबादला हो जाने के कारण याचिकाओं को दूसरी बेंच को सुनवाई के लिए भेजना पड़ा.

यह भी पढ़ें: पुणे पोर्श कांड: नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम से रिहा करने की मांग, बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका

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'सुनवाई के इंतजार में जेल में मौत...'

चौधरी ने इस बात पर जोर दिया कि एक दोषी कमाल अहमद अंसारी की अपील की सुनवाई के इंतजार में जेल में ही मौत हो चुकी है, जबकि अन्य अभी भी अपनी अपील की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं और राज्य मृत्युदंड की पुष्टि का इंतजार कर रहा है.

2006 में हुए थे धमाके

11 जुलाई 2006 को शहर की लोकल ट्रेनों की पश्चिमी रेलवे लाइन पर अलग-अलग जगहों से सात धमाके हुए. पहला धमाका शाम 6:20 बजे चर्चगेट से बोरीवली जाने वाली ट्रेन में हुआ. बम तब फटा, जब ट्रेन खार और सांताक्रूज स्टेशनों के बीच थी.

लगभग उसी वक्त बांद्रा और खार के बीच लोकल ट्रेन में एक और बम विस्फोट हुआ. इसके बाद जोगेश्वरी, माहिम, मीरा रोड-भयंदर, माटुंगा-माहिम और बोरीवली से पांच और विस्फोटों की जानकारी मिली.

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8 साल तक चले मुकदमे के बाद 13 में से 12 आरोपियों को दोषी ठहराया गया. 12 में से 5 को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत स्पेशल कोर्ट ने 2015 में मौत की सजा सुनाई. बाकी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
 

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