लोकसभा में गुरुवार को संसद के विशेष सत्र के दौरान परिसीमन बिल पर हंगामेदार चर्चा हुई. इस दौरान महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और इस बिल को महिलाओं के हितों के बजाय परिसीमन से जोड़ने की कोशिश बताया.
'महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को अलग रखें'
उन्होंने कहा- कानून मंत्री कि बात से ऐसा लग रहा था कि, पहली बार सदन में महिला आरक्षण पर चर्चा हो रही है. अपने भाषण में उन्होंने ऐसा ढांचा बनाने की कोशिश की. आज से ही 3 साल पहले गृह मंत्री ने ऐसी ही बातें की थीं. अगर दोनों की बातें सुनेंगे तो 90 प्रतिशत वही बातें हैं, जो आज कानून मंत्री ने कहीं. उस समय भी ऐसी ही बातें थीं. तब भी हमने यही कहा था कि हमारी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे सरल कीजिए, ताकि जब पारित हो तभी लागू हो जाए. इसे परिसीमन के साथ न जोड़ें.
सदन में बोलते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार बार-बार महिला आरक्षण के रास्ते में बाधाएं खड़ी कर रही है. उन्होंने याद दिलाया कि यदि 2023 में विपक्ष की बात मानी गई होती, तो महिला आरक्षण 2024 से ही लागू हो चुका होता. गोगोई ने सरकार से साफ तौर पर कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से न जोड़ा जाए.
'महिला आरक्षण सीधे लागू किया जाए'
उन्होंने कहा, 'हम लगातार यह मांग कर रहे हैं कि महिला आरक्षण को सीधे लागू किया जाए. अगर सरकार इसे परिसीमन से अलग कर देती है, तो हम इसका पूरा समर्थन करेंगे.' कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि मौजूदा विधेयक वास्तव में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के बजाय एक अलग राजनीतिक उद्देश्य को साधने का माध्यम बन रहा है.
गोगोई ने अपनी स्पीच में यह भी कहा कि यह बिल महिला सशक्तिकरण के नाम पर लाया गया है, लेकिन इसके पीछे की मंशा कुछ और ही लगती है. उन्होंने इसे “बैक डोर से परिसीमन लागू करने की कोशिश” करार दिया. उनके मुताबिक, इस तरह के प्रावधान से महिला आरक्षण का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है और इसकी प्रक्रिया अनावश्यक रूप से टल सकती है.
संसद में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. जहां सरकार इस विधेयक को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लागू करने में देरी और जटिलता पैदा करने वाला कदम मान रहा है.
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