RG Kar मामले में बड़ा एक्शन, निलंबित डॉक्टर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू

आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने निलंबित डॉक्टर डॉ. अविक डे के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है. सरकार ने उनके पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिले की भी अलग से जांच के आदेश दिए हैं. जूनियर डॉक्टरों ने उन पर धमकी और लापरवाही जैसे आरोप लगाए थे.

Advertisement
पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा कदम, विवाद में घिरे डॉक्टर अविक डे की बढ़ीं मुश्किलें. (File Photo: ITG) पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा कदम, विवाद में घिरे डॉक्टर अविक डे की बढ़ीं मुश्किलें. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 23 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:14 PM IST

कोलकाता के आरजी कर रेप और मर्डर मामले के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने निलंबित डॉक्टर डॉ. अविक डे के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है. इसके साथ ही उनके पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिले को लेकर भी अलग जांच के आदेश दिए गए हैं.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग से जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है. इसके मुताबिक, डॉ. अविक डे के खिलाफ औपचारिक विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है. डॉ. अविक डे बर्दवान मेडिकल कॉलेज के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में पूर्व रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (RMO) रह चुके हैं. 

Advertisement

वो फिलहाल कोलकाता के IPGME&R में जनरल सर्जरी के इन-सर्विस पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी के तौर पर जुड़े हुए हैं. राज्यपाल RN रवि ने डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दे दी है. डॉ. डे सितंबर 2024 से 'पश्चिम बंगाल सेवा (CCA) नियम, 1971' के तहत निलंबित चल रहे हैं.

बंगाल सरकार की अधिसूचना में कहा गया है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला लिया गया कि डॉ. अविक डे के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए. सरकार ने यह भी कहा कि सर्विस कोटा के जरिए पोस्टग्रेजुएट कोर्स में हुए दाखिले की अलग से जांच कराई जाएगी.

दरअसल अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात एक महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना के बाद डॉ. अविक डे जांच के दायरे में आए थे. इस घटना ने पूरे देश में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था और कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए थे.

Advertisement

जूनियर डॉक्टरों ने डॉ. अविक डे पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. इनमें मेडिकल कॉलेज में धमकी का माहौल बनाने, डॉक्टरों के तबादलों में दखल देने, करीब दो साल तक कक्षाओं से अनुपस्थित रहने, रिपोर्ट जमा नहीं करने और मरीजों के इलाज में लापरवाही बरतने जैसे आरोप शामिल हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement