मद्रास हाई कोर्ट ने विजय थलपति की फिल्म 'जन नायकन' से जुड़े विवाद पर सुनवाई की और मामले के सिंगल जज के पास भेज दिया है. हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को ठीक से सुनने के बाद जल्दी फैसला देने को कहा है. कोर्ट ने प्रोडक्शन हाउस को रिट कोर्ट में अपनी याचिका में बदलाव करने और CBFC चेयरपर्सन के आदेश को भी चुनौती देने का निर्देश दिया है.
सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) और विजय थलपति की फिल्म 'जन नायकन' के प्रोड्यूसर KVN प्रोडक्शंस के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है. यह फ़िल्म पोंगल से पहले 9 जनवरी को रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन CBFC से सर्टिफिकेशन न मिलने की वजह से रिलीज में देरी हुई. इससे पहले मामले पर 20 जनवरी को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जहां चीफ जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.
15 जनवरी को मेकर्स सुप्रीम कोर्ट गए थे, लेकिन जजों ने तुरंत कोई राहत नहीं दी और उन्हें अपना मामला मद्रास हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच के सामने पेश करने को कहा था. यह फिल्म 2026 की सबसे ज़्यादा इंतज़ार की जाने वाली फ़िल्मों में से एक है. फिल्म के कानूनी पचड़े में पड़ने के बाद थलपति विजय के फ़ैंस और फ़िल्म की टीम दोनों का इंतजार बढ़ गया.
15 दिसंबर- 'जना नायकन' फिल्म का पोस्ट-प्रोडक्शन पूरा हुआ.
18 दिसंबर- फिल्म को CBFC चेन्नई में जमा किया गया.
24 दिसंबर- मेकर्स ने सुझाए गए छोटे-मोटे एडिट, कट और म्यूट स्वीकार किए. रिवाइज्ड वर्जन फिर से जमा किया और U/A 16+ बताया गया.
5 जनवरी- मेकर्स को शिकायत के बारे में बताया गया
6 जनवरी- KVN प्रोडक्शंस ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की.
9 जनवरी- सिंगल जज, जस्टिस पीटी आशा ने CBFC को U/A सर्टिफिकेशन जारी करने का निर्देश दिया.
11 जनवरी- 20 जनवरी के बाद सुनवाई तय होने के बाद प्रोड्यूसर्स सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.
15 जनवरी- सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया और फिल्म मेकर्स को मद्रास हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच से संपर्क करने का निर्देश दिया.
20 जनवरी- मद्रास हाई कोर्ट ने सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रखा गया.
नलिनी शर्मा / अनघा