CCTV लगे हैं दिल्ली-हरियाणा-पंजाब में, फुटेज जा रही पाकिस्तान, चाइनीज 'EYE' से जासूसी!

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी भारत पर निगरानी बढ़ाने के लिए लगातार तिकड़म अपना रही है. पाकिस्तान अब भारत के संवेदनशील जगहों में सोलर पावर से चलने वाले ऐसे सीसीटीवी कैमरे लगा रहा है, जिसकी फुटेज उसे भारत से सीधे तौर पर मिल रही थी. भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने जालंधर, पटियाला, अंबाला में ऐसे कैमरों का पता लगाया है.

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सोलर पावर से जासूसी की पाकिस्तान की चाल (Photo: Pexels) सोलर पावर से जासूसी की पाकिस्तान की चाल (Photo: Pexels)

कमलजीत संधू

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अपनी ट्रैकिंग क्षमता को फिर से अपडेट कर रहे हैं. दरअसल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को भारतीय सेना और BSF की गतिविधियों, लॉजिस्टिक्स, सैनिकों की तैनाती और पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में मौजूद रणनीतिक ठिकानों का लाइव विज़ुअल लेने की तैयारी कर रहा है. इसका मकसद भविष्य में होने वाले किसी भी संघर्ष के लिए 'टारगेट' को अपजेट कर सकें. 

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सुरक्षा ग्रिड के सूत्रों ने बताया कि ISI का मकसद 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद अपनी ट्रैकिंग क्षमता को फिर से बनाना था. इसके लिए ISI ने एक नई तरकीब अपनाई है और उसने सोलर-पावर्ड चाइनीज EseeCloud CCTV कैमरों का इस्तेमाल कर रहा है. 

एक सूत्र ने बताया कि CCTV से जुड़े इस मामले को इस साल जनवरी में BSF की 'G ब्रांच' ने केंद्रीय एजेंसियों के सामने उठाया था.  पाकिस्तान के अंदर मौजूद एक 'डीप एसेट' ने आगाह किया था कि पाकिस्तान भारत में CCTV प्लान पर काम कर रहा है.

दिल्ली पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए अपनी 'स्पेशल सेल' के ज़रिए दो अभियान चलाए और पंजाब तथा दिल्ली से 11 लोगों को गिरफ़्तार किया.  इन छापों के दौरान पुलिस ने 09 ऐसे सोलर-पावर्ड CCTV कैमरे बरामद किए जिनमें SIM कार्ड लगे हुए थे; इन कैमरों को संवेदनशील सुरक्षा प्रतिष्ठानों के पास लगाया गया था ताकि वहां से लाइव वीडियो फ़ीड भेजी जा सके. इसके साथ ही पुलिस को 04 पिस्तौलें (3 PX5 और 1 देसी) और 24 जिंदा कारतूस भी मिले. 

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SIM और सोलर पावर से चलने वाले चाइनीज सीसीटीवी

गिरफ्तार किए गए आरोपियों का कथित तौर पर पाकिस्तान में बैठे गुर्गों से नियमित संपर्क था और वे एक सुनियोजित जासूसी मॉड्यूल चला रहे थे. गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में से 8 पंजाब के और 3 दिल्ली के हैं. 

लेकिन इसकी शुरुआत इस साल मार्च में गाजियाबाद पुलिस के एक सघन अभियान से हुई थी, जिसने दिल्ली-NCR इलाके में सक्रिय पाकिस्तान से जुड़े ISI जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया और उसे खत्म कर दिया. 

यह गिरोह संवेदनशील जगहों पर सोलर-पावर्ड, SIM-इनेबल्ड CCTV कैमरे लगा रहा था, ताकि वीडियो फुटेज जैसे सैनिकों की हलचल, सेना के रास्ते, रेलवे की गतिविधियां, हथियार से जुड़े मूवमेंट को कैप्चर करके व्हाट्सएप और खास ऐप्स के ज़रिए सीधे पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को लाइव-स्ट्रीम कर सके. उनका मकसद 50 अहम जगहों पर कैमरे लगाने का था. 

इस ग्रुप ने गुपचुप तरीके से कम से कम दो ऐसे कैमरे लगाए थे. एक दिल्ली कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन पर और दूसरा सोनीपत रेलवे स्टेशन (हरियाणा) पर. यह कैमरा 18 मार्च, 2026 को पकड़े जाने और हटाए जाने से पहले पंद्रह दिनों से भी ज़्यादा समय तक लाइव स्ट्रीमिंग कर रहा था. 

मार्च के गाज़ियाबाद-सोनीपत मामले में भी उसी तरीके का इस्तेमाल किया गया था. यानी कि सोलर पावर और SIM से चलने वाले CCTV कैमरे. 

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जालंधर, पटियाला, अंबाला से वीडियो जा रहे थे पाकिस्तान

पकड़ा गया ये मॉड्यूल सक्रिय रूप से रियल-टाइम ट्रैकिंग कर रहा था. नौ सोलर SIM-इनेबल्ड कैमरे पहले से ही सीधे ISI को लाइव फुटेज भेज रहे थे. ये कैमरे कपूरथला, जालंधर, पटियाला, मोगा और अंबाला जैसी जगहों पर लगे थे. ये भीतरी इलाकों के ऐसे रणनीतिक क्षेत्र थे जिन पर 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद ISI नजर रखना चाहता था. 

सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI उत्तरी भारत में अपने 'स्लीपिंग सेल्स' या नए भर्ती किए गए एजेंटों के जरिए इन कैमरों को खरीदकर लगवा रहा था. 

सूत्रों के मुताबिक मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद दिल्ली भर में फैले सीसीटीवी कैमरों के पूरे नेटवर्क को मोडिफाई किया जा रहा है क्योंकि एजेंसियों ने चीनी संबंधों का संकेत दिया था. 

सूत्रों के अनुसार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के अनुबंधों में 'मेड इन इंडिया' की अनिवार्य शर्त होती है, इसलिए सीएपीएफ प्रतिष्ठानों के अंदर लगे कैमरों के साथ छेड़छाड़ की संभावना कम है. लेकिन अधिक चिंताजनक बात यह है कि सैन्य इकाई के आसपास के इलाकों में आम नागरिकों द्वारा इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अब निगरानी में है. 

टोल प्लाजा का CCTV क्यों चाहता था पाकिस्तान

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यह अनिवार्य है कि अंदर और बाहर दोनों क्षेत्रों को पूरी तरह से सुरक्षित किया जाए. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने टोल प्लाजा से सैन्य काफिले के गुजरने के दौरान जानकारी हासिल करने के लिए बेताब प्रयास किए थे. 

सूत्रों ने कहा है कि इंटेलिजेंस एजेंसियों ने पहले बताया है कि कैसे सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल सैनिकों की मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए किया जाता है. CCTV का इस्तेमाल अक्सर दुश्मन युद्ध जैसे हालात में हथियार के तौर पर करते हैं. हाल ही में इजरायल ने ईरान लीडरशिप पर CCTV कैमरों का इस्तेमाल करके हमला किया और कई सेंसिटिव जगहों की निगरानी की. 

इससे साफ पता चलता है कि चीनी इक्विपमेंट हमेशा से चिंता का कारण रहे हैं. 

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