ईरान जंग के बीच भारत में अब 'पानी' भी हो जाएगा महंगा! LPG के दाम बढ़ने के बाद मंडरा रहा नया संकट

गर्मी के मौसम से ठीक पहले इस उद्योग पर बढ़ता लागत दबाव चिंता का कारण बन रहा है. कई पैकेज्ड वाटर कंपनियों ने अपने वितरकों को भेजे पत्रों में बताया है कि युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. इसके चलते कुछ कंपनियों ने पहले ही वितरण स्तर पर कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं.

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भारत का पैकेज्ड वाटर बाजार लगभग 5 अरब डॉलर का माना जाता है (Photo- Representational) भारत का पैकेज्ड वाटर बाजार लगभग 5 अरब डॉलर का माना जाता है (Photo- Representational)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:22 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है. बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण बोतलबंद पानी की लागत तेजी से बढ़ रही है. उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इसका सीधा असर आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत का पैकेज्ड वाटर बाजार लगभग 5 अरब डॉलर का माना जाता है और यह दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है. विशेषज्ञों के अनुसार, देश में भूजल की गुणवत्ता बड़ी चुनौती बनी हुई है. शोध के मुताबिक भारत में करीब 70 प्रतिशत भूजल किसी न किसी रूप में प्रदूषित है, जिसके कारण बड़ी आबादी सुरक्षित पीने के पानी के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर रहती है.

गर्मी के मौसम से ठीक पहले इस उद्योग पर बढ़ता लागत दबाव चिंता का कारण बन रहा है. कई पैकेज्ड वाटर कंपनियों ने अपने वितरकों को भेजे पत्रों में बताया है कि युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. इसके चलते कुछ कंपनियों ने पहले ही वितरण स्तर पर कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं.

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उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, प्लास्टिक बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाले पॉलीमर की कीमत में बड़ा उछाल आया है. पॉलीमर कच्चे तेल से बनता है और वैश्विक तेल कीमतों में तेजी का सीधा असर इस पर पड़ता है. हाल के हफ्तों में बोतल बनाने वाली सामग्री की लागत प्रति किलोग्राम लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है.

केवल बोतल ही नहीं, बल्कि उसके ढक्कन, लेबल और पैकेजिंग सामग्री की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं. उद्योग के अनुसार बोतलों के कैप की कीमत दोगुने से अधिक हो गई है. वहीं पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कॉरुगेटेड बॉक्स, लेबल और चिपकाने वाली टेप की लागत भी काफी बढ़ चुकी है.

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तेल कीमतों में तेजी जारी रहती है और सप्लाई चेन में सुधार नहीं होता, तो आने वाले महीनों में बोतलबंद पानी की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. ऐसे में भीषण गर्मी के दौरान बोतलबंद पानी पर निर्भर उपभोक्ताओं के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो सकता है.

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