देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) के सीईओ पीटर एल्बर्स (Pieter Elbers) ने इस्तीफा दे दिया है. एयरलाइन का संचालन करने वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation) ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी. पिछले साल दिसंबर में इंडिगो को नए 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन' नियमों (FDTL Rules) के साथ समय रहते सामंजस्य नहीं बिठाने के चलते उड़ान संबंधी बड़े संकट का सामना करना पड़ा था. माना जा रहा है कि पीटर एल्बर्स का इस्तीफा उसी घटना का परिणाम है.
फिलहाल इंडिगो के मैनेजिंग डायरेक्टर Rahul Bhatia ने अंतरिम तौर पर एयरलाइन कंपनी का प्रबंधन संभाल लिया है. सितंबर 2022 में सीईओ बनने के बाद एल्बर्स के लगभग तीन साल के कार्यकाल में इंडिगो ने 10 अरब डॉलर से अधिक का रेवेन्यू हासिल किया. इस दौरान एयरलाइन की फ्लीट में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई और यह 440 से अधिक विमानों तक पहुंच गया. इंडिगो ने एयरबस (Airbus) को 500 विमानों का ऐतिहासिक ऑर्डर भी दिया है.
हालांकि इन उपलब्धियों के बावजूद दिसंबर 2025 में कंपनी के संचालन में बड़ा संकट सामने आया. यह संकट पायलटों की थकान रोकने के लिए लागू किए गए नए नियमों को लागू करने में आई दिक्कतों के कारण पैदा हुआ. इंडिगो को 3 से 5 दिसंबर, 2025 के बीच अपनी 2500 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और करीब 1900 उड़ानों में देरी हुई, जिससे 3 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए. इस घटना के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन पर रिकॉर्ड 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और पीटर एल्बर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया. इस संकट से एयरलाइन की विश्वसनीयता को काफी नुकसान पहुंचा.
पीटर एल्बर्स ने पिछले साल के संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वीकार किया था कि इंडिगो तीन दिनों तक अपने ग्राहकों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह संकट एयरलाइन के 20 वर्षों के सफर और उसकी उपलब्धियों को परिभाषित नहीं करता. उन्होंने हैदराबाद में एक कार्यक्रम में कहा था, 'हम यह नहीं होने दे सकते कि तीन दिन या चाहें तो सात दिनइंडिगो के 20 वर्षों में किए गए काम को परिभाषित कर दें।. हमें इससे सीख लेनी होगी. हम दुनिया के सबसे बड़े ऑपरेटरों में से एक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और ऐसी एयरलाइन बनना चाहते हैं जो भारत के आकार, संभावनाओं और अवसरों के अनुरूप हो.'
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