अहमदाबाद-धोलेरा कनेक्टिविटी होगी आसान, देश की पहली सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना को मंजूरी

Indian Railways: केंद्रीय कैबिनेट ने भारत की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना को मंजूरी दे दी है, जिसमें अहमदाबाद से धोलेरा तक 134 किलोमीटर लंबा डबल लाइन रेलवे ट्रैक बनाया जाएगा. इस परियोजना की लागत ₹20,667 करोड़ रुपये है और इसे 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

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अहमदाबाद–धोलेरा सेमी हाई-स्पीड रेलवे परियोजना को मंजूरी (फोटो- ITG) अहमदाबाद–धोलेरा सेमी हाई-स्पीड रेलवे परियोजना को मंजूरी (फोटो- ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST

भारत की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना को मंजूरी मिल गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ये ऐतिहासिक फैसला लिया गया है. इस परियोजना के तहत अहमदाबाद (सरखेज) से धोलेरा तक 134 किलोमीटर लंबी डबल लाइन रेलवे ट्रैक बनाया जाएगा. इसकी अनुमानित लागत ₹20,667 करोड़ रुपये है. परियोजना को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. 

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सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इसमें पूरी तरह स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे ‘न्यू इंडिया’ की आधुनिक और आत्मनिर्भर परिवहन व्यवस्था का प्रतीक बताया है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक रेल लाइन नहीं है, बल्कि पूरे देश में सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का आधार बनेगी.

यात्रा समय में होगी बड़ी कमी
इस नई रेल लाइन के बनने से अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यात्रा का समय 1 घंटे से भी कम हो जाएगा. लोग आसानी से एक ही दिन में आ-जा सकेंगे. यह लाइन धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR), आने वाले धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स को आधुनिक रेल कनेक्टिविटी देगी. साथ ही यह अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से भी सीधे जुड़ जाएगी.

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इस परियोजना से गुजरात के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी. अहमदाबाद मंडल के डिविजनल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र में रोजगार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स को बड़ा बूस्ट देगी. लगभग 284 गांवों और 5 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा.

भारतीय रेलवे के अनुसार, इस परियोजना से सालाना करीब 0.48 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और लगभग 2 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम होगा. यह पर्यावरण के लिए इतना अच्छा है जितना कि 10 लाख पेड़ लगाने से होता है. यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है, जिसका मकसद देश में मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है.


 

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