हमारे देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा रोजाना रेलवे से सफर करता है. यही वजह है भारतीय रेलवे को देश की लाइफ लाइन भी कहा जाता है. ट्रेनों को सुरक्षित, सुविधाजनक तरीके से और तेज गति से चलाने की दिशा में भारतीय रेलवे निरंतर तकनीकी और आधारभूत ढांचे मे बदलाव करता रहता है. इसी कड़ी में उत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल द्वारा यात्रियों को समय से पहुंचाने और ट्रेनों को समय पर चलाने के लिए दोहरीकरण व विद्युतीकरण का कार्य किया जा रहा है.
दरअसल, लखनऊ मंडल के रुदौली-बड़ागांव-देवराकोट-सोहावल रेलखंड पर 22.83 किलोमीटर रेलवे लाइन का दोहरीकरण और विद्युतीकरण पूरा कर लिया गया है. यह रूट लखनऊ से अयोध्या के बीच पड़ता है. बता दें कि बाराबंकी से जौनपुर रेल खंड (237.65 किलोमीटर) में रेलपथ के दोहरीकरण/विद्युतीकरण सबंधी कार्यों के अंतर्गत दर्शंनगर- गोसाईंगंज रेलखंड पर 26.76 किमी., गोसाईंगंज - अकबरपुर 22.20 किमी. एवं शाहगंज- जौनपुर रेल मार्ग पर 33.34 किमी के रेल मार्ग के दोहरीकरण/विद्युतीकरण की कमीशनिंग का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है.
इसी तरह रुदौली-सोहावल के मध्य दोहरीकरण/विद्युतीकरण के कार्य की स्वीकृति के बाद बाराबंकी से जौनपुर रेलखंड पर कुल 105.13 किमी का रेल मार्ग दोहरीकृत /विद्युतीकृत हो जाएगा. इन्ही कार्यों के मद्देनजर उत्तर/पूर्वोत्तर परिमंडल के रेल संरक्षा आयुक्त मोहम्मद लतीफ़ खान द्वारा रुदौली, बड़ागांव,देवराकोट और सोहावल स्टेशनों का निरीक्षण करते हुए स्टेशन पर पैनल रूम ,संरक्षा अभिलेखों, संरक्षा संबंधी कार्यालयों, संरक्षा के सभी आवश्यक मानकों, संसाधनों, उपकरणों, इत्यादि का अवलोकन किया गया है.
रेल संरक्षा आयुक्त ने रेलवे लाइन सहित अन्य समस्त आवश्यक प्रक्रियाओं का ट्रॉली द्वारा रुदौली से बड़ागांव तथा बड़ागांव से सोहावल के बीच गहनता से निरीक्षण किया. साथ ही मार्ग में पड़ने वाले छोटे-बड़े रेल पुलों, फाटकों, क्रॉसिंग , OHE installation , टर्न आउट, सिग्नलिंग व्यवस्था तथा रेलपथ की संरक्षा की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए इसकी समीक्षा की. इस विषय में आवश्यक सुझाव और निर्देश दिए. इसके बाद रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा सोहावल से रुदौली के मध्य स्पीड ट्रायल किया गया.
लतीफ खान ने बताया कि रेलवे के आधुनिकीकरण और नवीनीकरण की दिशा में इस रेलखंड के दोहरीकरण और विद्युतीकरण के चलते रेल परिचालन और अधिक सुगम तथा सुविधाजनक हो जाएगा. वहीं, गाड़ियों की क्रॉसिंग न होने के कारण परिचालन समय में बचत होगी, जिससे गाड़ियां तीव्र गति से चलेंगी. ऐसे में लखनऊ से अयोध्या तक का सफर कम समय में तय किया जा सकेगा.
उदय गुप्ता