भारत ने कनाडा में ट्रांसनेशनल हिंसा से जुड़े आरोपों को किया खारिज, निज्जर मामले में नए दावों को बताया 'बेबुनियाद'

भारत और कनाडा के बीच रिश्तों को सुधारने की कोशिशों के बीच एक कनाडाई मीडिया रिपोर्ट ने फिर विवाद खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट में भारतीय अधिकारियों को हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़ने का दावा किया गया है, जिसे भारत ने सिरे से खारिज करते हुए 'राजनीति से प्रेरित' बताया है.

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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. (photo: Reuters) कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. (photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:02 AM IST

भारत ने सोमवार को कनाडा में ट्रांसनेशनल हिंसा या संगठित अपराध से अपने किसी भी लिंक के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. ये बयान कनाडाई मीडिया की एक नई रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें भारतीय अधिकारियों को खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़ने की कोशिश की गई है.

दरअसल, द ग्लोब एंड मेल अखबार ने दो अज्ञात सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कनाडाई राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों को ऐसे सबूत पेश किए गए थे कि वैंकूवर में कार्यरत भारतीय वाणिज्य दूतावास के स्टाफ ने निज्जर की हत्या में सहायता के लिए जानकारी मुहैया कराई थी.

कनाडाई अखबार की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से भारतीय अधिकारी का नाम भी बताया गए हैं. हालांकि, भारत 2023 में खालिस्तानी समर्थक की हत्या में भारतीय संलिप्तता के कनाडा के आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है.

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खास है रिपोर्ट की टाइमिंग

ये रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई है, जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच व्यापक बातचीत हुई, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को काफी बढ़ाने पर फोकस किया गया.

कनाडा की ओर से जारी रीडआउट में कहा गया कि पीएम कार्नी ने ट्रांसनेशनल दमन से निपटने के लिए कनाडा द्वारा जारी उपायों पर जोर दिया.

दिलचस्प बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई पीएम मार्क कार्नी के बीच हुई बातचीत के बाद जारी कनाडाई रीडआउट में भी 'ट्रांसनेशनल रिप्रेशन' यानी विदेशी दमन के खिलाफ कदम उठाने की बात कही गई है. भारत ने इसे सार्वजनिक या राजनीतिक विमर्श के बजाय कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया है.

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न्यायिक प्रक्रिया में भारत का भरोसा

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि निज्जर मामले में आपराधिक जांच स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार चल रही है. विदेश मंत्रालय में पूर्वी क्षेत्र के सचिव पी. कुमारन ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'भारत अंतरराष्ट्रीय हिंसा या संगठित अपराध में संलिप्तता के आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है. ये दावे निराधार, राजनीतिक रूप से प्रेरित और बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद विश्वसनीय साक्ष्यों से समर्थित नहीं हैं.'

कुमारन ने कहा, 'भारत का मानना है कि इस तरह की चिंताओं का समाधान विश्वसनीय कानून प्रवर्तन और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक या राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से.'

उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ये मामला पूर्ण जूरी ट्रायल के चरण में जाएगा. कनाडा में एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया है और ये उसी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगा. भारत ने न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार बनाए रखा है. भारत ने दोहराया कि बिना सबूत के ऐसे आरोप लगाना संबंधों को सुधारने की कोशिशों में बाधा डालता है.

भारत-कनाडा का सुरक्षा समझौता

विवाद के बावजूद, दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई वार्ता में व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है. दोनों देशों ने ड्रग्स के अवैध प्रवाह, विशेष रूप से 'फेंटानिल प्रिकर्सर्स' और अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्कों से निपटने के लिए सुरक्षा और कानून प्रवर्तन पर द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का फैसला किया है. पीएम मार्क कार्नी ने भरोसा दिलाया कि कनाडा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा.

भारत और कनाडा के रिश्ते 2023 में जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद बेहद खराब हो गए थे. उस वक्त भारत ने ट्रूडो के दावों को 'हास्यास्पद' बताया था और दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निकाल दिया था. हालांकि, पिछले साल मार्क कार्नी की जीत के बाद रिश्तों को 'रीसेट' करने की प्रक्रिया शुरू हुई है. दोनों देशों ने अपने उच्चायुक्तों को फिर से नियुक्त कर दिया है और अब ध्यान रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर है. भारत का रुख साफ है कि सहयोग और आरोप एक साथ नहीं चल सकते.

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