भारत ने करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2025 में पांच पायदान की छलांग लगाई है. इस इंडेक्स में भारत 182 देशों और क्षेत्रों में 91वें स्थान पर पहुंच गया है. पिछले साल भारत की रैंक 96 थी. यह इंडेक्स अंतरराष्ट्रीय NGO ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने जारी किया है. भारत के स्कोर में पिछले साल के मुकाबले एक अंक का सुधार दर्ज किया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रगति धीमी रही है और कई देशों में बीते साल जनता का गुस्सा देखने को मिला. इंडेक्स के मुताबिक भ्रष्टाचार दुनिया के हर हिस्से में एक गंभीर चुनौती बना हुआ है और सीमित संकेतों को छोड़ दें तो सुधार की रफ्तार बेहद कमजोर है.
भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर संकट
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सत्ता के दुरुपयोग, लोकतांत्रिक संतुलन के कमजोर होने और स्वतंत्र नागरिक समाज पर हमलों के कारण स्थिति और बिगड़ रही है. रिपोर्ट में भारत को उन देशों में भी शामिल किया गया है, जहां भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए हालात खतरनाक माने जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, जब भ्रष्टाचार की रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों पर हमले होते हैं या उनकी हत्या कर दी जाती है, तो सत्ता को जवाबदेह ठहराना मुश्किल हो जाता है और भ्रष्टाचार और बढ़ता है.
भारत का स्कोर कितना?
वर्ष 2012 के बाद से दुनिया भर में संघर्ष क्षेत्रों के बाहर 829 पत्रकारों की हत्या हुई है, जिनमें से 90 फीसदी से ज्यादा ऐसे देशों में हुई, जिनका स्कोर 50 से कम रहा. इसमें भारत (39) भी शामिल है. इंडेक्स में 0 से 100 तक के स्केल पर देशों को आंका जाता है, जहां 0 का मतलब बेहद भ्रष्ट और 100 का मतलब बेहद साफ व्यवस्था होता है.
कौन सबसे ऊपर-कौन सबसे नीचे
रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक औसत स्कोर घटकर 42 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया है और दो-तिहाई से ज्यादा देशों का स्कोर 50 से नीचे है. 89 पॉइंट्स के साथ डेनमार्क टॉप पर बना हुआ है, इसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर हैं.
सबसे निचले पायदान पर 9 पॉइंट्स के साथ दक्षिण सूडान और सोमालिया रहे, जबकि उनके बाद वेनेजुएला का स्थान है. अमेरिका 29वें और ब्रिटेन 20वें स्थान पर रहा. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए मजबूत नेतृत्व की कमी के कारण वैश्विक स्तर पर हालात लगातार कमजोर हो रहे हैं.
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