G20 समिट के बहाने तैयार हो गया चीन के BRI का सबसे बड़ा जवाब, यूरोप तक दिखेगी भारत की धमक

G-20 सम्मेलन के पहले दिन भारत ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर के निर्माण का ऐलान किया किया. इस प्रोजेक्ट में मध्य पूर्व और यूरोपीय देशों के अलावा अमेरिका भी अहम साझीदार है. इस कॉरिडोर को चीन के बीआरआई के जवाब के रूप में देखा जा रहा है.

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जी 20 सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं के साथ पीएम मोदी जी 20 सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं के साथ पीएम मोदी

गीता मोहन

  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को एक ऐतिहासिक घोषणा की गई. सभी महाद्वीपों में आर्थिक एकीकरण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी द्वारा भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप इकोनॉमिक गलियारे (India Middle East Europe Economic Corridor- IMEC) के लॉन्च का ऐलान किया गया. इस पहल में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, यूरोपीय संघ, फ्रांस, इटली, जर्मनी और अमेरिका शामिल है.

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सपनों के विस्तार के बीज बो रहे हैं- पीएम

पीएम मोदी ने बताया कि यह गलियारा 'भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच आर्थिक एकीकरण का प्रमुख माध्यम' होगा, जो वैश्विक कनेक्टिविटी और सतत विकास में एक नया अध्याय पेश करेगा. इस परियोजना द्वारा पेश की जाने वाली पर्याप्त संभावनाओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, 'मज़बूत कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर मानव सभ्यता के विकास का मूल आधार हैं. आज जब हम कनेक्टिविटी का इतना बड़ा इनिशिएटिव ले रहे हैं, तब हम आने वाली पीढ़ियों के सपनों के विस्तार के बीज बो रहे हैं.'

यह परियोजना अपने दो मार्गों माध्यम से राष्ट्रों के बीच अधिक आर्थिक एकीकरण का मंच तैयार करती है, जिसमें शामिल हैं: पूर्वी गलियारा, जो भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ता है और दूसरा है उत्तरी सिरा, जो अरब की खाड़ी को यूरोप से जोड़ेगा. वस्तुओं और सेवाओं की सुगम आवाजाही की सुविधा के लिए तैयार किए गए इस गलियारे में रेलवे और शिपिंग रूट होगा, जो डिजिटल और बिजली केबल नेटवर्क पर आधारित होगा.

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बाइडेन ने IMEC का महत्व समझाया

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने आईएमईसी के वैश्विक महत्व पर जोर दिया. उन्होंने इसे 'एक बड़ी उपलब्धि' के रूप में पेश किया और 'आर्थिक गलियारा' शब्द के आगामी दशक में प्रमुखता से गूंजने की भविष्यवाणी की. उन्होंने अंगोला से हिंद महासागर तक फैली एक नई रेल लाइन में निवेश करके कनेक्टिविटी बढ़ाने की अमेरिकी प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला. बाइडेन ने विश्वास जताया कि यह परियोजना रोजगार पैदा करने और विश्व स्तर पर खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है.

चीन के BRI की काट है ये योजना!

G7 देशों द्वारा पोषित, पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट (PGII) तहत स्थापित इस गलियारे का लक्ष्य चीन की बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) पहल का मजबूती से जवाब देना है. पीजीआईआई द्वारा समर्थित जी7 का सामूहिक प्रयास, उभरते देशों में बुनियादी ढांचे के विकास को आर्थिक मदद देने से भागीदार देशों के बीच व्यापार वृद्धि में महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादों के साथ वैश्विक आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे.

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह गलियारा यात्रा के समय को 40% तक कम कर देगा. उन्होंने इसे 'भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच सबसे सीधा संबंध' बताया. इस बीच, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मो. बिन सलमान ने इस परिवर्तनकारी पहल के फलीभूत होने के प्रति उत्सुकता जाहिर की.

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व्हाइट हाउस का बयान

व्हाइट हाउस ने इस परिकल्पित रेल बुनियादी ढांचे को मौजूदा समुद्री और सड़क आवागम नेटवर्क के पूरक के रूप में एक विश्वसनीय और लागत प्रभावी विकल्प बताया और कहा कि इससे वैश्विक व्यापार संभावनाओं में तेजी आएगी. भागीदार देशों ने आगामी 60 दिनों के भीतर एक कार्य योजना तैयार करने की प्रतिबद्धता जताते हुए इस ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.

संप्रभुता की अनिवार्यता को और अधिक रेखांकित करने के लिए, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और वैश्विक नेताओं ने सभी देशों की संप्रभुता के लिए सम्मान की आवश्यकता को दोहराया. यह स्पष्ट जोर चीन की विवादास्पद बेल्ट और रोड पहल को संतुलित करने की दिशा में साझा दृष्टिकोण का एक प्रमाण था.

ये राष्ट्राध्यक्ष रहे शामिल

उच्च स्तरीय कार्यक्रम में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रॉ, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन, इटली की प्रधान मंत्री जियोर्जिया मेलोनी और विश्व बैंक के प्रमुख अजय बंगा सहित वैश्विक नेता मौजूद रहे. यह विशाल गठबंधन इस परियोजना के वैश्विक महत्व को दर्शाता है और वैश्विक सहमति और साझा दृष्टिकोण को रेखांकित करता है.

मई में हुई थी शुरुआत
आईएमईसी परियोजना, जिसकी चर्चा मई 2023 की शुरुआत में हुई थी, में कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाने, भारत-पाकिस्तान संबंधों में मौजूदा बाधाओं को दूर करने और यूरोप और फारस की खाड़ी के राज्यों के बीच रेल कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करने की परिकल्पना की गई है, जो संभवतः भविष्य में इज़राइल तक विस्तारित होगी. आईएमईसी के माध्यम से जहाज,ट्रेन मार्ग का परिचालन कई उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण आवाजाही समाधान प्रदान कर सकता है औरव्यापार क्षमता को बढ़ा सकता है तथा आगे बढ़ने के लिए एक स्थायी रास्ता तैयार कर सकता है.

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