भारत सरकार ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की मेगा डिफेंस डील को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है. रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में अगले 2-3 दिनों में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा होगी, जिनका निर्माण भारत में लगभग 30% स्वदेशी सामग्री के साथ किया जाएगा.
रक्षा क्षेत्र के सूत्रों ने इंडिया टुडे/आजतक को बताया कि प्रस्ताव के अनुसार, इस सौदे में फ्रांस भारतीय वायु सेना को लगभग 12-18 राफेल जेट फ्लाई-अवे कंडीशन दिए जाएंगे. जबकि बाकी बचे हुए विमानों का निर्माण भारत में होगा, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री (indigenous content) होगी. हालांकि, 'मेक इन इंडिया' के मानकों में 50-60 प्रतिशत स्वदेशी हिस्सेदारी की अपेक्षा होती है, लेकिन इस सौदे में इसे कम रखा गया है.
2-3 दिनों में होगी बैठक
सूत्रों ने बताया कि अगले दो-तीन दिनों में होने वाली रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा के लिए रखे जाने वाले प्रस्ताव के अनुसार, भारतीय पक्ष फ्रांस से ये भी अपील कर रहा है कि वह सरकार-से-सरकार समझौते के तहत भारतीय मिसाइलों और स्वदेशी प्रणालियों को फ्रांसीसी विमानों में एकीकृत करने की अनुमति दे. स्रोत कोड केवल फ्रांसीसी पक्ष के पास ही रहेंगे.
IAF का राफेल पर भरोसा
दिलचस्प बात ये है कि भारत फ्रांस के साथ इस समझौते को आगे बढ़ा रहा है, जबकि अमेरिका और रूस दोनों ने भारतीय वायु सेना को अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एफ-35 और एसयू-57) देने की पेशकश की है. इन विमानों में स्वदेशी सामग्री केवल 30 प्रतिशत के आसपास होगी.
बावजूद इसके भारतीय वायुसेना का भरोसा राफेल पर टिका हुआ है. यदि इस सौदे को मंजूरी मिलती है तो भारतीय सेना के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी. वर्तमान में वायुसेना के पास 36 विमान हैं और नौसेना ने पिछले साल 26 विमानों का ऑर्डर दिया था.
SOC ने रक्षा मंत्रालय को दिया प्रस्ताव
दरअसल, भारतीय वायु सेना द्वारा तैयार किए गए 114 राफेल जेट विमानों के प्रस्ताव का विवरण (एसओसी) कुछ महीने पहले रक्षा मंत्रालय को प्राप्त हुआ था. रक्षा मंत्रालय द्वारा अनुमोदित होने के बाद इस प्रस्ताव को सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति से अंतिम मंजूरी लेनी होगी.
'ऑपरेशन सिंदूर' में राफेल की शानदार सफलता
बताया जाता है कि राफेल को लेकर ये तेजी 'ऑपरेशन सिंदूर' में इसके शानदार प्रदर्शन के बाद आई है. उस दौरान राफेल ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी 'स्पेक्ट्रा' इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक के जरिए चीन की पीएल-15 मिसाइलों को आसानी से मात दी थी.
भारत में राफेल का निर्माण
इसी प्रदर्शन ने वायुसेना के भरोसे को और मजबूत किया है. इस सौदे के तहत फ्रांस हैदराबाद में एम-88 इंजन के लिए मरम्मत सुविधा (MRO) भी स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है. फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट ने पहले ही फ्रांसीसी मूल के लड़ाकू विमानों के रखरखाव के लिए एक फर्म स्थापित कर ली है. इस निर्माण कार्य में टाटा जैसी भारतीय कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं.
वहीं, भारत की बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए नए लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है. भविष्य में वायुसेना के लड़ाकू विमान बेडे में मुख्य रूप से सुखोई-30 एमकेआई, राफेल और स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाएं शामिल होने की उम्मीद है.
भारत ने पहले ही 180 एलसीए मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दे दिया है. इसके अलावा 2035 के बाद बड़ी संख्या में स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी शामिल करने की योजना बना रहा है.
मंजीत नेगी