उत्तर और मध्य भारत के ऊपर मौसम ने शनिवार को मौसमी गतिविधियों में जबरदस्त परिवर्तन देखने को मिला और यह वेदर सिस्टम अभी खत्म होने वाला नहीं है. एक शक्तिशाली वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने पतझड़ के मौसम को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे अप्रैल की शुरुआती गर्मी की जगह आंधी, तेज बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिल रहा है.
राजधानी दिल्ली के कई हिस्सों में शनिवार को आसमान काला और सर्दियों जैसा नजर आया. मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, क्योंकि करीब 1000 किलोमीटर लंबा बादलों का बैंड पूरे इलाके में फैल गया, जिससे दिन में भी अंधेरा छाया रहा.
बेमौसम बारिश की क्या है वजह?
इस असामान्य मौसम की मुख्य वजह एक बेहद सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है. इसे ऐसे समझें जैसे- भूमध्यसागर क्षेत्र से आने वाली नमी से भरी एक विशाल कन्वेयर बेल्ट. जब यह वेदर सिस्टम भारत की ओर बढ़ता है, तो यह मैदानी इलाकों की गर्म हवा से टकराता है. इससे प्री-मानसून कंवेक्टिव एक्टिविटी बनती है.
सूरज की गर्मी से जमीन गर्म होती है और गर्म हवा तेजी से ऊपर उठती है. जब यह गर्म हवा ठंडी और नम हवा से टकराती है, तो विशाल क्यूम्युलोनिंबस क्लाउड बनते हैं. ये बादल अचानक और तेज बारिश, बिजली और आंधी का कारण बनते हैं. इस बार यह वेदर सिस्टम असामान्य रूप से लंबा और सीधी रेखा में फैला हुआ है, जिससे उत्तर भारत के बड़े हिस्से में मौसम बिगड़ा हुआ है.
दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में शनिवार को इस वेदर सिस्टम का असर चरम पर था, लेकिन अब यह सिस्टम देश के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ रहा है. रविवार को इसका असर उत्तर भारत के मध्य और पूर्वी हिस्सों में ज्यादा रहेगा. झांसी, ग्वालियर और उत्तर मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और थंडरस्क्वॉल (अचानक तेज हवा) की आशंका है. थंडरस्क्वॉल में हवा की रफ्तार 60-70 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है, जो कच्चे ढांचों को नुकसान पहुंचाने और फसलों को गिराने के लिए काफी होती है. इसलिए मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
अप्रैल में ओले क्यों गिर रहे?
ओले इन तेज तूफानों का सबसे खतरनाक हिस्सा होते हैं. बड़े तूफानी बादलों के अंदर ऊपर उठती तेज हवाएं पानी की बूंदों को ऊंचाई पर जमा देती हैं, जहां तापमान बहुत कम होता है. वहां ये बूंदें जमकर बर्फ के गोले बन जाती हैं. ये बार-बार ऊपर-नीचे घूमते हुए परत दर परत मोटे होते जाते हैं, और जब बहुत भारी हो जाते हैं, तो जमीन पर ओलों के रूप में गिरते हैं.
किसानों की बढ़ेगी परेशानी
बारिश से तापमान में करीब 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट जरूर आई है, लेकिन ओलावृष्टि किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. राजस्थान और हरियाणा में पहले ही फसलों को भारी नुकसान हो चुका है. अब यह सिस्टम पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की ओर बढ़ रहा है, जिससे फसलों के नुकसान का खतरा बना हुआ है. मौसम विभाग ने लोगों, खासकर किसानों को सलाह दी है कि वे सतर्क रहें, क्योंकि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अभी पूरे क्षेत्र में सक्रिय है और आने वाले दिनों में भी इसका असर जारी रह सकता है.
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