हरिवंश की राज्यसभा डिप्टी चेयरमैन के रूप में वापसी तय, पहली बार मनोनीत सदस्य संभालेगा यह पद

राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन पद के लिए हरिवंश का तीसरी बार निर्विरोध चुना जाना तय है. एनडीए के पांच प्रस्तावों के मुकाबले विपक्ष ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा और चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है.

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हरिवंश का राज्यसभा के उपसभापति के रूप में निर्विरोध चुना जाना तय. (Photo: PTI) हरिवंश का राज्यसभा के उपसभापति के रूप में निर्विरोध चुना जाना तय. (Photo: PTI)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:41 PM IST

हरिवंश का राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन पद पर तीसरी बार निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, उनके समर्थन में कुल पांच प्रस्ताव (नोटिस) दाखिल किए गए हैं, जबकि विपक्ष की ओर से एक भी नामांकन दाखिल नहीं किया गया है. बता दें कि हरिवंश राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत राज्यासभा सांसद हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए राष्ट्रपति ने राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनीत किया है.

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एनडीए की ओर से दाखिल इन प्रस्तावों में राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जेडीयू के नेता संजय कुमार झा और राष्ट्रीय लोक दल के नेता व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी शामिल हैं. गुरुवार दोपहर 12 बजे नामांकन की समय सीमा समाप्त होने के बाद यह तय हो गया कि इस पद के लिए मुकाबला एकतरफा रहेगा.

राज्यसभा में डिप्टी चेयरमैन का चुनाव शुक्रवार सुबह 11 बजे निर्धारित है. संसदीय प्रक्रिया के अनुसार, सदन के नेता द्वारा दिए गए पहले प्रस्ताव को वॉइस वोट के जरिए पारित किया जाएगा. इसके बाद राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन हरिवंश को निर्वाचित घोषित करेंगे. चूंकि विपक्ष की ओर से कोई प्रत्याशी नहीं है, इसलिए उनका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है.

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विपक्ष ने इस चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है. विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा में पिछले सात वर्षों से डिप्टी स्पीकर का चुनाव नहीं कराया गया है, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है. इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन के चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का निर्णय लिया. यह पहली बार होगा जब कोई मनोनीत सदस्य राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन पद पर आसीन होगा.

​​हरिवंश इससे पहले 2018 से 2020 और फिर 2020 से 2026 तक इस पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. हालांकि, तब वह जेडीयू के राज्यसभा सांसद के रूप में सदन में मौजूद थे. उनके अनुभव और एनडीए के मजबूत समर्थन के चलते उनकी वापसी लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है. हरिवंश को राज्यसभा के उप सभापति के रूप में फिर से चुने जाने को लेकर जहां एनडीए एकजुट दिख रहा है, वहीं विपक्ष विरोध के प्रतीक के रूप में बहिष्कार का रास्ता अपना रहा है.

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