UCC बिल पेश होने से पहले गुजरात विधानसभा मे हंगामा, विपक्ष ने उठाया पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी लाइनों का मुद्दा

गुजरात विधानसभा में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी बहस हुई. कांग्रेस ने पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों और सप्लाई की कमी का मुद्दा उठाया, जबकि बीजेपी ने इसे यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया.

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 गुजरात सरकार विधानसभा में UCC बिल पेश करने जा रही है, डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी करेंगे पेश गुजरात सरकार विधानसभा में UCC बिल पेश करने जा रही है, डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी करेंगे पेश

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:22 AM IST

गुजरात विधानसभा में मंगलवार को पेट्रोल-डीजल की कथित कमी के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला. इसी बीच राज्य सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश करने की तैयारी में है, जिस पर सियासी घमासान और तेज हो गया है. असल में कांग्रेस नेता अमित चावड़ा पेट्रोल की कमी का मुद्दा उठा रहे थे. वहीं बीजेपी की ओर से कहा गया कि कांग्रेस UCC के मुद्दे से भटकाने के लिए ये मामला उठा रही है.

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कांग्रेस ने उठाया पेट्रोल-डीजल की कमी का मुद्दा
गुजरात विधानसभा में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा राज्य में पेट्रोल-डीजल की कमी और पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारों का मुद्दा उठा रहे थे. उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने नियम 108 के तहत नोटिस भी दिया है. इस पर विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर नियम 116 के तहत नोटिस को मंजूरी दे दी गई है और इस पर कल चर्चा कराई जाएगी. 

क्या बोले डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी?
वहीं, सरकार की ओर से उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य में कहीं भी सप्लाई की कोई दिक्कत नहीं है और सरकार ने लोगों से अपील की है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से ध्यान भटकाने के लिए यह मुद्दा उठा रही है. इसके बाद सदन में माहौल गरमा गया और दोनों पक्षों के विधायकों के बीच तीखी कहासुनी हुई. 

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इस बीच, गुजरात सरकार मंगलवार को विधानसभा में UCC बिल पेश करने जा रही है, जिसे उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी सदन में प्रस्तुत करेंगे. इस बिल में शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में सभी धर्मों और वर्गों के लिए एक समान नियम लागू करने का प्रावधान है, साथ ही उल्लंघन करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान भी रखा गया है. 

उत्तराखंड की तर्ज पर बनाए गए प्रावधान
बताया जा रहा है कि इसके ज्यादातर प्रावधान उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड की तर्ज पर बनाए गए हैं. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस इस बिल का विरोध कर रही हैं, हालांकि विधानसभा में बहुमत होने के कारण यह बिल विधानसभा में आसानी से पारित हो सकता है. 

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