चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, सरकार ने SC में नकारे सभी आरोप

सरकार ने कहा कि यह दलील गलत है कि निर्वाचन आयोग तभी स्वतंत्र रूप से काम करेगा, जब चयन समिति में न्यायिक सदस्य को भी शामिल किया जाए. संवैधानिक पद पर बैठे लोग निष्पक्षता से ही काम करते हैं.

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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर सभी आरोप नकार दिए हैं सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर सभी आरोप नकार दिए हैं

संजय शर्मा / कनु सारदा

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 11:26 PM IST

निर्वाचन आयोग में पिछले सप्ताह हुई चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को शामिल न करने का विरोध करने वाली याचिका पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया. सरकार ने कहा कि यह दलील गलत है कि निर्वाचन आयोग तभी स्वतंत्र रूप से काम करेगा, जब चयन समिति में न्यायिक सदस्य को भी शामिल किया जाए. संवैधानिक पद पर बैठे लोग निष्पक्षता से ही काम करते हैं. निर्वाचन आयुक्तों की योग्यता पर कोई प्रश्न नहीं उठाया गया है. याचिकाकर्ता का मकसद राजनीतिक विवाद खड़ा करना है. इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई होनी है.

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केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों से निष्पक्षता से कार्य करने की अपेक्षा की जानी चाहिए. केंद्र ने याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया और कहा कि आरोप पूरी तरह से आधारहीन हैं. केंद्र ने चुनाव आयुक्त अधिनियम पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाओं का विरोध किया. साथ ही आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर विवाद पैदा करने का प्रयास किया गया था.

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कारणों को उचित ठहराते हुए केंद्र ने कहा कि आगामी राष्ट्रीय आम चुनाव और चार राज्यों के एक साथ होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए अकेले अपने कार्यों का निर्वहन करना मानवीय रूप से संभव नहीं होगा. इसलिए, 14 मार्च को 2 चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की गई, जिन्होंने आयोग में महत्वपूर्ण कार्यात्मक, प्रशासनिक और नीतिगत जिम्मेदारियां संभाली हैं. 16 मार्च को चुनावों के कार्यक्रम की भी घोषणा की गई और प्रक्रिया शुरू हो गई है.

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केंद्र ने कहा कि नियुक्ति के पीछे कुछ अस्पष्ट और अनिर्दिष्ट उद्देश्यों के बारे में सिर्फ गलत बयानों के आधार पर एक राजनीतिक विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है. संवैधानिक पद संभालने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता के बारे में कोई सवाल नहीं उठाया गया है.

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