दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शराब नीति मामले में राहत पा चुके AAP नेताओं की निगाहें अब सोमवार को होने वाली कोर्ट कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार को एक बेहद अहम याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है. केजरीवाल चाहते हैं कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा उनके खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई न करें.
सोमवार दोपहर 2.30 बजे का वक्त जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में गहमागहमी भरा रहने वाला है. केजरीवाल ने फैसला किया है कि वो इस याचिका पर खुद बहस करेंगे. 6 अप्रैल को जब यह अर्जी पेश की गई थी, तब कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए 13 अप्रैल की तारीख मुकर्रर की थी. उनकी आशंका है कि वर्तमान बेंच के सामने न्याय नहीं मिल पाएगा.
जज को हटाने की मांग सिर्फ केजरीवाल की नहीं है. मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक समेत विजय नायर और अरुण रामचंद्र पिल्लई जैसे प्रतिवादियों ने भी मोर्चा खोल दिया है. 27 फरवरी को लोअर कोर्ट ने इन सभी को बरी करते हुए सीबीआई के केस को 'डिस्क्रेडिटेड' यानी पूरी तरह अविश्वसनीय करार दिया था. 9 मार्च को यह मामला जस्टिस शर्मा के पास पहुंचा.
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सीबीआई की अपील पर सभी को नोटिस जारी कर दिया. जज ने पहली नजर में ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों को गलत बताया था, जिसने 'आप' खेमे की चिंताएं बढ़ा दीं. केजरीवाल के विरोध का एक बड़ा आधार जस्टिस शर्मा का 'अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद' (RSS समर्थित संगठन) के एक सेमिनार में शामिल होना बताया गया है.
इस पर सीबीआई ने अपने जवाब में कड़ी आपत्ति जताई है. जांच एजेंसी ने इसे बेईमान और मनमाना आरोप करार देते हुए कहा कि किसी कानूनी सेमिनार में जाना किसी वैचारिक झुकाव का सबूत नहीं है. सीबीआई ने दो टूक कहा कि यह मांग 'फोरम शॉपिंग' (अपनी पसंद की अदालत चुनना) के अलावा और कुछ नहीं है.
इससे पहले केजरीवाल ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के सामने भी इस केस को ट्रांसफर करने की गुहार लगाई थी. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि 'रिक्यूज़ल' (सुनवाई से हटना) का फैसला पूरी तरह से संबंधित जज के विवेक पर निर्भर करता है. अब गेंद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के पाले में है. क्या वह खुद को इस मामले से अलग करेंगी?
क्या सीबीआई की तर्कों को मानेंगी जिसमें इस अर्जी को अदालत की अवमानना बताया गया है? इसका फैसला सोमवार की सुनवाई में होगा.
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