केरल के कोल्लम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 21 मार्च 2026 को डॉ. वंदना दास हत्या के सनसनीखेज मामले में दोषी जी. संदीप को उम्रकैद की सजा सुनाई है. न्यायाधीश पी.एन. विनोद ने आरोपी को हत्या के लिए आजीवन कारावास के साथ-साथ विभिन्न अन्य अपराधों के लिए कुल 30 वर्ष की सजा सुनाई. अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले आरोपी को 30 साल की सजा काटनी होगी, उसके बाद ही उम्रकैद की सजा शुरू होगी. साथ ही आरोपी पर 2.35 लाख रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में 1 लाख रुपये) का जुर्माना भी लगाया गया है.
अभियोजन पक्ष ने सजा के दौरान मौत की सजा की मांग की थी. लेकिन अदालत ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' कैटेगरी में नहीं रखा है. न्यायाधीश ने माना कि आरोपी में सुधार की संभावना है, क्योंकि उसने अदालत में पछतावे का इजहार किया था. हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि सजा अपराध की गंभीरता के अनुरूप होनी चाहिए, जिसमें सुधार के साथ-साथ निवारक (deterrent) प्रभाव भी हो. इसलिए, विभिन्न धाराओं की सजाएं एक के बाद एक (consecutively) चलेंगी.
अभियोजक ने की मौत की सजा की मांग
अदालत के फैसले के बाद विशेष लोक अभियोजक (SPP) प्रताप जी. पडिक्कल ने मीडिया को बताया कि वो उम्रकैद को मौत की सजा में बदलवाने के लिए ऊपरी अदालत में अपील करेंगे.
अभियोजन पक्ष का तर्क है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए ये सजा कम है. न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि सजा केवल सुधारात्मक ही नहीं, बल्कि निवारक भी होनी चाहिए, इसीलिए उन्होंने लगातार चलने वाली जेल की सजा का प्रावधान किया है. दोषी ने अदालत में दावा किया कि वह अपने शेष जीवन में पछतावा करेगा.
क्या बोला परिवार
कोर्ट के फैसले के बाद डॉ. वंदना की मां ने रोते हुए कहा कि परिवार केरल ज्यादा से ज्यादा सजा की मांग कर सकता है और सजा तय करना अदालत का काम है. उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले के खिलाफ परिवार आगे की कोर्ट में अपील करेगा, लेकिन उन्होंने इस सवाल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि उनकी बेटी को न्याय मिला या नहीं.
उन्होंने रोते हुए कहा कि वह चाहती हैं दोषी को भी वही दर्द सहना पड़े जो उनकी बेटी को सहना पड़ा था, जब उसने वंदना को 27 बार चाकू मारे थे.
वंदना के पिता ने फैसले को परिवार के लिए थोड़ी राहत तो बताया, लेकिन इसे पूरा न्याय मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अभियोजक के साथ चर्चा के बाद सजा बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएंगे.
अदालत ने 17 मार्च को ही संदीप को हत्या, सबूत मिटाने और गलत तरीके से रोकने समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया था. इसके अलावा उसे केरल हेल्थकेयर सर्विस पर्सन्स एंड हेल्थकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (प्रिवेंशन ऑफ वायलेंस एंड डैमेज टू प्रॉपर्टी) एक्ट 2012 की धाराओं के तहत भी दोषी पाया गया.
संदीप ने खुद 112 नंबर पर कॉल कर दावा किया था कि उसकी जान को खतरा है, जिसके बाद पुलिस उसे अस्पताल लाई थी. इस हत्याकांड के बाद राज्य में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे.
क्या है मामला
आपको बता दें कि ये मामला 10 मई 2023 की है. जब तड़के पुलिस ने दोषी संदीप को मेडिकल इलाज के लिए कोट्टाराकारा तालुक अस्पताल में भर्ती कराया था. इलाज के दौरान उसने पहले पुलिस अधिकारियों और एक अन्य व्यक्ति पर हमला किया जो उसके साथ अस्पताल गया था और उसने डॉ. वंदना पर हमला कर दिया.
हमले में बुरी तरह घायल डॉक्टर को इलाज के लिए तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
डॉ. दास कोट्टायम जिले के कडुथुरुथी क्षेत्र की मूल निवासी थीं और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं. वह अजीजिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हाउस सर्जन थीं और अपने प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में कोट्टाराकारा तालुक अस्पताल में काम कर रही थीं.
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