दिल्ली पुलिस ने छावला गैंगरेप-मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किए तीनों आरोपियों के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर की है. पुलिस की ओर से कहा गया है कि इस मामले में नए तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने की जरूरत है.
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि छावला केस के आरोपियों में से एक विनोद ने अपनी रिहाई के बाद एक निर्दोष ऑटो चालक की हत्या कर दी जब उसने डकैती के प्रयास का विरोध किया. इसके बाद से विनोद को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस ने कहा कि रिहाई के बाद हत्या करना दर्शाता है कि वह एक शातिर अपराधी है.
विनोद अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति है, जो समाज के लिए खतरा है और किसी भी प्रकार से नरमी का पात्र नहीं है. इस पर सीजेआई ने कहा कि मैं इस केस में जस्टिस एसआर भट और जस्टिस बेला त्रिवेदी की बेंच गठित करूंगा. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2022 को छावला इलाके में 19 साल की बेटी के साथ हुई दरिंदगी और हत्या के आरोपियों को बरी कर दिया था. इस मामले में निचली अदालत और हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी.
क्या है छावला गैंगरेप का मामला?
यह मामला उत्तराखंड के पौड़ी में रहने वाली 19 साल की युवती के अपहरण के बाद दरिंदगी और हैवानियत का है. आरोपियों लड़की के साथ रेप किया था. इसके बाद उसकी आंखों में तेजाब तक डाल दिया था. रोंगटे खड़े कर देने वाली यह घटना साल 2012 की है. दरअसल 14 फरवरी 2012 को उत्तराखंड की 'निर्भया' अपने काम पर जाने के लिए घर से निकली थी. उस दिन वो देर शाम तक घर नहीं लौटी तो परिजन चिंतित हुए. घबराए परिजनों ने उसकी काफी तलाश की। लेकिन कोई सुराग नहीं लगा. बहुत खोजने के बाद इतनी सूचना जरूर मिली कि कुछ लोग एक लड़की को गाड़ी में डालकर दिल्ली से बाहर ले जाते हुए दिखाई दिए हैं.
इस मामले में दोषियों ने लड़की के साथ रेप के साथ उसे असहनीय यातना भी दी थी. लड़की को कार में इस्तेमाल होने वाले औजारों से पीटा गया, उसके शरीर को जगह जगह सिगरेट से दागा गया था और उसके चेहरे को तेजाब से जलाया गया था. इसके बाद अभियुक्त गिरफ्तार किए गए थे. दिल्ली की अदालत ने 19 साल की युवती से रेप और हत्या के दोषी ठहराए जाने के बाद मौत की सजा सुनाई थी. इस फैसले को सही मनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा पर मुहर लगा दी थी. इसके बाद दोषियों की तरफ से सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गयी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को किया बरी
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस यू यू ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने 7 नवंबर, 2022 को इस मामले में फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों रवि कुमार, राहुल और विनोद को बरी कर दिया था.
अनीषा माथुर / नलिनी शर्मा